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गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षणों की पहचान होने से सुरक्षित प्रसव में मिलती है मदद- high-level





- प्रसव पूर्व जांच के माध्यम से होती है उच्च जोखिम के लक्षणों की पहचान
- गर्भवतियों के लिये पौष्टिक भोजन बेहद जरूरी, ताकि स्वास्थ्य रहे शिशु

(बक्सर ऑनलाइन न्यूज़):- कोरोना काल के बाद सभी स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित किया जा रहा है। ताकि, लाभुकों और मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। ऐसे में जिला स्वास्थ्य समिति ने जिला में गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जांच कार्यों को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया है। इसी क्रम में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े अधिकारियों व सहयोगी संस्थानों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किये हैं। ताकि, गर्भवती माताओं के प्रसव पूर्व जांच समय पर पूरा हो। निर्धारित प्रसव पूर्व जांच दिवस पर गर्भवती महिलाओं के सभी प्रकार के आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जांच सुनिश्चित किया जा रहा है। जिससे गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम के लक्षणों की पहचान संभव है। साथ ही, इससे सुरक्षित प्रसव में भी मदद मिलती है।
ओरल ग्लूकोज ट्लोरेंस टेस्ट बेहद जरूरी : 
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल भट्ट ने बताया, गर्भवती महिलाओं के तीन जांच जिनमें गर्भवती महिलाओं के शुगर, यूरिन तथा हीमोग्लोबिन सहित ओरल ग्लूकोज ट्लोरेंस टेस्ट बेहद जरूरी है। साथ ही, शरीर में रसायनिक परिवर्तन होने के कारण गर्भावस्था के समय शुगर होने की संभावना की जानकारी होती है। उन्होंने बताया, जांच के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के लिये जांच के साथ-साथ पौष्टिक भोजन भी बेहद जरूरी है। इसके लिये  एएनएम,आशा एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से गर्भवती महिलाओं के पोषण मूल्यांकन करने, जांच के पश्चात जरूरी दवाइयां, गर्भवती माता तथा परिजनों को सुरक्षित मातृत्व के लिए माताओं का पोषण संबंधी आवश्यक सलाह, गर्भावस्था के दौरान वजन का नहीं बढ़ना तथा गंभीर एनीमिया आदि के विषय में जानकारी दी जाये। ताकि गर्भावस्था के दौरान उच्च जोखिम को समझा जा सके। 
खतरे के 9 लक्षणों के बारे में जानकारी रखना आवश्यक : 
आईसीडीएस की डीपीओ तरणि कुमारी ने बताया, गर्भवती महिलाओं में भोजन को लेकर कई भ्रम मौजूद हैं। लेकिन खानपान को लेकर सही जानकारी रखना आवश्यक है। गर्भवती महिला घी, नारियल पानी, पका पपीता आदि का सेवन करें। इसके साथ ही दाल, दुग्ध उत्पाद,हरी सब्जियों, पीला और खट्टे फल, सहित साबूत मूंग, अरहर, मसूर, चना और राजमा सहित मांस मछली, अंडा, चिकेन आदि का सेवन करें। उन्होंने बताया, गर्भावस्था के दौरान खतरे के 9 लक्षणों के बारे में जानकारी रखना आवश्यक है।. इनमें गर्भवस्था के दौरान पैरों में अत्यधिक सूजन, सांस लेने में कठिनाई, पेशाब करने में जलन महसूस होना, बार बार बुखार आना, पेट में दर्द, योनि में रक्तस्राव, प्रसव से पहले ही पानी की थैली का फट जाना, सिरदर्द, दृष्टि में झिलमिलाहट, चक्कर आना, गर्भ में शिशु की गति को महसूस नहीं कर पाना आदि गर्भवस्था के दौरान खतरे के लक्षण हैं।


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