बक्सर । जिले के स्थापना दिवस के अवसर पर साबित खिदमत फाउंडेशन की ओर से विशेष आयोजन किया गया, जिसमें केक काटने के साथ-साथ सैकड़ों पौधों का वितरण किया गया. इस अवसर पर संस्था के प्रमुख डॉ. दिलशाद आलम ने कहा कि 17 मार्च 1991 को बक्सर को भोजपुर से अलग कर एक नए जिले के रूप में स्थापित किया गया था. यह उपलब्धि बक्सर के नागरिकों के संघर्ष और एकजुटता का परिणाम थी. उन्होंने कहा कि इस मौके पर पौधरोपण कर हरित बक्सर अभियान को गति देने का लक्ष्य रखा गया है.
उन्होंने कहा कि बक्सर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गौरवशाली है. यह नवरत्न गढ़ किला, चौसा का मैदान और 1764 के ऐतिहासिक युद्ध का साक्षी रहा है. इसके अलावा, महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि और राम-लक्ष्मण की शिक्षा स्थली होने के कारण यह भूमि पौराणिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि बक्सर की गंगा-जमुनी तहजीब इसकी सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाती है.
संस्था द्वारा पहले भी हजारों पौधे लगाए जा चुके हैं और इस अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है. इस अवसर पर उपस्थित लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाते हुए अधिक से अधिक पौधरोपण करने के लिए प्रेरित किया गया. डॉ. दिलशाद आलम ने कहा कि पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है ताकि वे बड़े होकर पर्यावरण को स्वच्छ और शुद्ध बनाने में योगदान दे सकें.
कार्यक्रम में संस्था के सैकड़ों सदस्य शामिल हुए, जिनमें इम्तियाज अंसारी, रोशन कुमार, रुखसाना, रजिया, कविता, श्वेता, शीला, निराशा, राजमणि, विनीता, खुशी, सुमित, सोनम कुमारी और साबित रोहतासवी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे.
इस अवसर पर साबित रोहतासवी ने जिला प्रशासन द्वारा स्थापना दिवस को बड़े धूमधाम से मनाने की सराहना की और उन्हें बधाई दी. उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन लोगों में अपने जिले के प्रति प्रेम और गर्व की भावना को मजबूत करते हैं, साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देते हैं. उन्होंने कहा कि जिले के विकास और स्वच्छता में सभी नागरिकों को अपनी भूमिका निभानी चाहिए.
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