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जानकारी जरूरी, महिला बंध्याकरण की अपेक्षा 20 गुना सरल है पुरुष नसबंदी

 


- भ्रांतियों और अफवाहों के चक्कर में आकर नसबंदी कराने से हिचकते हैं पुरुष
- पुरुष नसबंदी के लिए लाभार्थी को दी जाती है 3000 रुपए की प्रोत्साहन राशि

बक्सर | जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग तत्पर है। लेकिन, भ्रांतियों और अफवाहों के चक्कर में आकर पुरुष अभी भी परिवार नियोजन के स्थायी साधनों के प्रति उदासीन बने बैठे हैं। जिनको दूर करने के लिए विभाग नई रणनीति के तहत कार्य करने जा रहा है। अब फ्रंट लाइन वर्कर्स को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वो दंपतियों को जागरूक करते हुए पुरुषों को नसबंदी के लिए प्रेरित करेंगे। ताकि, परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाई जा सके। यहां तक कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों को नसबंदी कराने के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि भी ज्यादा रखी गई है। नसबंदी के लिए पुरुष लाभार्थी को 3000 रुपए एवं प्रेरक को प्रति लाभार्थी 300 रुपए दिया जाता है। जबकि महिला नसबंदी के लिए लाभार्थी को 2000 रुपए एवं प्रेरक को प्रति लाभार्थी 300 रुपए दिया जाता है।
किसी भी तरह की शारीरिक या यौन कमजोरी नहीं आती :
अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अनिल भट्ट ने बताया, पुरुष नसबंदी के बाद किसी भी तरह की शारीरिक या यौन कमजोरी नहीं आती है। यह पूरी तरह सुरक्षित और आसान है। लेकिन अधिकांश पुरुष- अभी भी इसे अपनाने में हिचक रहे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि कहीं ना कहीं समुदाय में अभी भी पुरुष नसबंदी से संबंधित जानकारी का अभाव है। उन्होंने बताया कि नसबंदी के प्रति पुरुषों की उदासीनता की सबसे बड़ी वजह इससे जुड़ी भ्रांतियां हैं। लेकिन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन, सेंटर फार डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन जैसे आधिकारिक एजेंसियों के सर्वे और शोध इन अफवाहों और मिथकों का पूरी तरह खंडन करते हैं। उनका कहना है कि पुरुष नसबंदी से ना ही शारीरिक कमजोरी होती है और ना ही पुरुषत्व का क्षय होता है। दंपति  जब भी चाहे इसे अपना सकते हैं। 
पुरुष नसबंदी है बिल्कुल सुरक्षित :
डॉ. भट्ट ने बताया, पुरुषों की नसबंदी बिना टांका एवं चीरा एक घंटे के भीतर होता है। नसबंदी के बाद अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं होती। पुरुष नसबंदी की तुलना में महिला नसबंदी 20 गुना जटिलता से भरा होता है। पुरुष नसबंदी की तुलना में महिला नसबंदी के फेल होने की संभावना भी 10 गुना अधिक होती है। साथ ही, पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी की तुलना में तीन गुना कम महंगा होता है। उन्होंने बताया कि 14 से 20 नवंबर तक दंपति संपर्क सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें योग्य दंपति को परिवार नियोजन के प्रति जागरूक किया जायेगा। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर पंचायतवार आशा कार्यकर्ताओं का उन्मुखीकरण किया जा रहा है। 
पुरुष नसबंदी के लिए प्रखंडवार तिथि निर्धारित :
जिले के सभी प्रखंडवार पुरुषों की नसबंदी के लिए तिथि का निर्धारण किया जा चुका है। इस क्रम में 21 नवंबर और एक दिसंबर को चक्की और चौगाई के लाभार्थियों का ऑपरेशन डुमरांव अनुमंडल अस्पताल में किया जायेगा। वहीं, 21 व 29 नवंबर को नावानगर और केसठ के लाभुकों के लिए सीएचसी नावानगर में शिविर का आयोजन होगा। साथ ही, 23 व 30 नवंबर को सदर पीएचसी और यूपीएचसी अंतर्गत लाभुकों के लिए सदर अस्पताल में शिविर का आयोजन किया जाएगा। सिमरी के लोगों के लिए 25 नवंबर को सिमरी सीएचसी में कैंप लगेगा।



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