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कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को किया जा रहा है जागरूक : सीडीपीओ- national-center




- राष्ट्रीय पोषण माह के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों के पोषण क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों का हो रहा आयोजन
- सिमरी प्रखंड परिसर से जागरूकता रैली निकाल लोगों को दी गई पोषण की जानकारी

(बक्सर ऑनलाइन न्यूज़):- जिले में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जिनकी पूरी जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केन्द्रों की सेविका-सहायिका व पर्यवेक्षिकाओं के कंधों पर ही है। इस क्रम में सिमरी प्रखंड परिसर से शनिवार को पोषण जागरूकता रैली निकाली गई। जिसकी अध्यक्षता सीडीपीओ संगीता कुमारी ने की। रैली में पोषण कलश, बैनर व पोस्टर के साथ नारे भी लगाए गए। जिनके माध्यम से लाभुकों व आमजनों को जागरूक किया गया। जिसमें परियोजना अंतर्गत आंगनबाड़ी सेविकाएं व पर्यवेक्षिकाएं शामिल रहीं। वहीं, आंगनबाड़ी केंद्र अंतर्गत पोषक क्षेत्र के 0-6 वर्ष के सभी नामांकित बच्चों का वजन, ऊंचाई और लंबाई लेकर पोषण की जानकारी ली जा रही है। सीडीपीओ ने बताया, तीन अप्रैल तक स्थानीय स्तर पोषण की कमी को दूर करने के लिए पोषण पंचायत व पोषण वाटिका को लेकर गतिविधियों का आयोजन किया जायेगा। ताकि, कुपोषण को जड़ से मिटाने के लिए सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक किया जा सके।
कुपोषित बच्चों की पहचान और फिर स्वास्थ्य सुधार :
सीडीपीओ संगीता कुमारी ने बताया, पोषण माह में गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान कर उनके स्वास्थ्य सुधार के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे। इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। इसके अतिरिक्त रसोई व न्यूट्रीशन गार्डेन विकसित कराने का अभियान चलेगा। जहां खाली जमीन नहीं होगी, वहा गमलों में पौधे लगवाए जाएंगे। राष्ट्रीय पोषण मिशन के जिला परियोजना सहायक नेकी आलम ने बताया, ये सभी अभियान सीधे तौर पर शिशुओं, बच्चों व लाभार्थी महिलाओं को सेहतमंद बनाने में सहयोग करेंगे। कोरोना काल में अभियान का विशेष महत्व का होगा। बच्चों में कुपोषण दूर करना मौजूदा समय में सबसे बड़ी प्राथमिकता है। कुपोषित बच्चे किसी समाज के लिए सही नहीं है। इसी वजह से कुपोषण दूर करने पर पूरा जोर दिया जा रहा है।
कुपोषित बच्चों की संख्या कम करने के लिए किया जा रहा है प्रसार :
पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी स्थानीय स्तर के खानपान को बढ़ावा देकर स्वास्थ्य की डगर बनाई जाएगी। कुपोषित बच्चों की संख्या कम करने तथा कुपोषित को सुपोषित में तब्दील करने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया, इस अभियान में बच्चों, गर्भवती महिलाओं व स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए भोजन के सही तरीके से पकाने व खाने के बारे में जानकारी दी जाएगी। कुपोषण के खिलाफ अभियान में सभी की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी तथा कोविड-19 के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए इन गतिविधियों को चलाया जाएगा। वहीं, अभियान चला कर कुपोषित बच्चों को चिन्हित किया जा रहा है। यदि किसी में अति कुपोषण के लक्षण दिखाई पड़ेंगे, तो उस बच्चे का इलाज पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में कराया जायेगा।





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