- ‘फ्यूचर स्किल्स’ से ‘बियॉन्ड मार्क्स’ तक विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर दिया जोर
बक्सर । नोएडा में आयोजित राष्ट्रीय शैक्षिक कॉन्क्लेव में बक्सर के मिट्टी के लाल लेखक एवं वक्ता रोहित दुबे ने पैनलिस्ट के रूप में शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलाव और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। दिवंगत डॉ. बैजनाथ दुबे के पुत्र रोहित दुबे ने देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों से जुड़े कुलपतियों, शिक्षाविदों और शिक्षा विशेषज्ञों के साथ मंच साझा करते हुए भविष्य की शिक्षा और विद्यार्थियों के लिए जरूरी कौशलों पर चर्चा की।
कॉन्क्लेव के प्रथम दिन ‘इंडस्ट्री 5.0 के लिए भविष्य के कौशल’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में रोहित दुबे ने कहा कि आने वाले समय में केवल तकनीकी ज्ञान विद्यार्थियों की सफलता के लिए पर्याप्त नहीं होगा। बदलती तकनीक और कार्यक्षेत्र की जरूरतों के बीच सीखने की क्षमता, रचनात्मकता, संवाद कौशल, समस्या-समाधान, सहयोग, आत्मविश्वास और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
इस दौरान उन्होंने प्रो. (डॉ.) टंकेश्वर कुमार, कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा; यश पाल सिंह कंवर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं डीन, जेआईएमएस, रोहिणी; प्रो. (डॉ.) राजीव सूद, कुलपति, बाबा फरीद विश्वविद्यालय स्वास्थ्य विज्ञान, फरीदकोट; प्रो. (डॉ.) सतीश चंदर शर्मा, प्रति-कुलपति, बीबीडी-बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनऊ सहित शिक्षा जगत के अन्य विशेषज्ञों के साथ विचार साझा किए।
कॉन्क्लेव के दूसरे दिन ‘बियॉन्ड मार्क्स वे कौशल जो वास्तव में मायने रखते हैं’ विषय पर हुई पैनल चर्चा में भी रोहित दुबे ने प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाना होना चाहिए। रचनात्मक सोच, संवाद क्षमता, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता, समस्या-समाधान और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति आज के दौर में विद्यार्थियों के लिए बेहद जरूरी हैं।
इस पैनल में शिवप्रकाशम रमन, निदेशक, इरोड हिंदू कल्वी निलयम; अमरेंद्र पांडेय, संस्थापक निदेशक, जीके मेमोरियल स्कूल तथा डॉ. जसजीत सूद, प्रधानाचार्य, ओपीएस विद्या मंदिर, करनाल के साथ रोहित दुबे ने विचार-विमर्श किया।
रोहित दुबे शिक्षा, युवा विकास, शिक्षा से करियर की ओर संक्रमण और करियर-तैयारी जैसे विषयों पर लेखन एवं वक्तव्य के माध्यम से सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि विद्यार्थियों को केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि तेजी से बदलती दुनिया की वास्तविक चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार किया जाना चाहिए।
लगातार दो दिनों तक राष्ट्रीय स्तर की दो महत्वपूर्ण पैनल चर्चाओं में सहभागिता ने रोहित दुबे को देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ संवाद का अवसर दिया। कॉन्क्लेव में शिक्षा के बदलते स्वरूप, भविष्य के कौशल और अंकों से आगे विद्यार्थियों के समग्र विकास को लेकर हुए विमर्श को महत्वपूर्ण माना गया।
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