- 2012 से कर रहा था शिक्षक की नौकरी, 2023 में हुई थी फर्जी प्रमाणपत्र की शिकायत; जांच में 1997-99 सत्र में नामांकन नहीं मिलने का दावा
बक्सर/डुमरांव । नाबालिग छात्राओं के साथ कथित कुकर्म के मामले में आरोपित शिक्षकों को लेकर अब नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। डुमरांव प्रखंड के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र अंतर्गत नथुनी अहीर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय की घटना ने पूरे शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामले के मुख्य आरोपित शिक्षकों में शामिल बीरेंद्र प्रसाद को लेकर अब उसके शिक्षक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों से सामने आई जानकारी के अनुसार, बीरेंद्र प्रसाद, पिता रघुनाथ प्रसाद, वर्ष 2012 से शिक्षक के रूप में कार्यरत है। दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2023 में शिकायतकर्ता शत्रुघ्न सिंह ने जिला लोक शिकायत पदाधिकारी के यहां आवेदन देकर बीरेंद्र प्रसाद पर कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी करने का आरोप लगाया था और मामले की जांच की मांग की थी।
बताया जाता है कि उस समय तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी अनिल द्विवेदी के निर्देश पर बक्सर सदर के तत्कालीन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अजय प्रसाद के माध्यम से मामले की जांच कराई गई थी। जांच के दौरान अधिकारी पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर से संबद्ध बलिया स्थित श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय भी पहुंचे थे।
1997-99 सत्र में नामांकन नहीं होने का दावा :
सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान यह बात सामने आने का दावा किया गया कि बीरेंद्र प्रसाद ने नौकरी के दौरान जिस शिक्षक प्रशिक्षण प्रमाणपत्र को उक्त संस्थान के नाम से जमा किया था, उस प्रमाणपत्र से जुड़े 1997-99 सत्र में बीरेंद्र प्रसाद का नामांकन ही नहीं मिला। हालांकि, यह मामला बाद में ठंडे बस्ते में चला गया और आरोपित शिक्षक के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि जांच में वास्तव में प्रमाणपत्र को लेकर गंभीर आपत्ति सामने आई थी, तो उस समय कार्रवाई क्यों नहीं हुई? सूत्रों का दावा है कि तत्कालीन जांच से संबंधित संचिकाएं और रिपोर्ट विभाग के अभिलेखों में अब भी मौजूद हो सकती हैं और शिक्षा विभाग चाहे तो पुराने मामले की फाइलों को फिर से खंगाल सकता है।
नाबालिग छात्राओं से कुकर्म का मामला सामने आने के बाद तेज हुई कार्रवाई :
इधर, नथुनी अहीर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय में नाबालिग छात्राओं के साथ कथित कुकर्म का मामला सामने आने के बाद पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों ने कार्रवाई तेज कर दी है। पीड़िता की मां के बयान पर तीन नामजद शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
बक्सर एसपी शुभम आर्य के निर्देश पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए विद्यालय के प्रधानाचार्य मो. इमाम अली को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, मामले के दो अन्य आरोपित शिक्षक बीरेंद्र प्रसाद और अरविंद कुमार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। पुलिस टीम उनके संभावित ठिकानों के साथ-साथ घरों और अन्य स्थानों पर भी तलाश में जुटी है।
तीनों आरोपी निलंबित, बर्खास्तगी की विभागीय कार्रवाई शुरू :
घटना के बाद शिक्षा विभाग ने भी कड़ा रुख अपनाया है। प्रधानाध्यापक समेत तीनों आरोपित शिक्षकों को निलंबित कर उनके विरुद्ध बर्खास्तगी की विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
वहीं, 5 सितंबर को प्रधानाचार्य मो. इमाम अली को मिलने वाला राजकीय पुरस्कार भी स्थगित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि डीएम साहिला के पत्र के बाद पुरस्कार पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ नाबालिग छात्राओं के साथ कथित यौन शोषण का ही नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग की उस पुरानी जांच का भी है, जिसमें कथित रूप से बीरेंद्र प्रसाद के प्रमाणपत्र पर गंभीर सवाल उठे थे। यदि पुराने आरोप और जांच के दावे सही पाए जाते हैं, तो यह मामला विभागीय लापरवाही और वर्षों तक कार्रवाई न होने की बड़ी कहानी भी सामने ला सकता है।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपित शिक्षकों की तलाश में जुटी है, जबकि शिक्षा विभाग की पुरानी फाइलें खुलती हैं या नहीं, इस पर सबकी नजर टिकी हुई है।
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