बक्सर । गरीबों के हिस्से का अनाज कथित तौर पर रिमोट कंट्रोल और डिजिटल कांटे की हेराफेरी के जरिए गायब किए जाने के आरोपों ने जिले की सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिमरी प्रखंड के खाद्यान्न गोदाम में सामने आए कथित घटतौली और अनाज चोरी के मामले के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। प्रारंभिक कार्रवाई के तहत सिमरी के सहायक गोदाम प्रबंधक (एजीएम) को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है, टेक्निकल असिस्टेंट को हटाने का आदेश दिया गया है तथा संबंधित ट्रांसपोर्टर से कारण बताओ नोटिस (शोकॉज) जारी किया गया है।
राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के बक्सर जिला प्रबंधक नरेंद्र कुमार ने गुरुवार को बताया कि ट्रांसपोर्टर और एजीएम की लापरवाही तथा खाद्यान्न वितरण में गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि सिमरी के एजीएम की जगह इटाढ़ी के एजीएम को प्रभारी बनाया गया है। साथ ही डीलरों के प्रदर्शन और कथित वायरल ऑडियो की जानकारी मिलने के बाद पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी गई है।
डिजिटल कांटे में चिप और रिमोट से हेराफेरी का आरोप :
बुधवार को पीडीएस विक्रेताओं का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब दर्जनों जन वितरण प्रणाली दुकानदारों ने सिमरी खाद्यान्न गोदाम के बाहर प्रदर्शन कर जमकर नारेबाजी की। विक्रेताओं का आरोप है कि गोदाम पिछले तीन दिनों से बंद था और कई महीनों से निर्धारित मात्रा से कम खाद्यान्न दिया जा रहा था। उनका दावा है कि गोदाम में लगे कंप्यूटरीकृत वे-ब्रिज (डिजिटल कांटा) में इलेक्ट्रॉनिक चिप और रिमोट कंट्रोल लगाकर तौल में हेराफेरी की जा रही थी। प्रदर्शनकारियों के अनुसार इस कथित खेल का खुलासा ट्रांसपोर्टर के एक कर्मी ने किया, जिसके बाद कथित बातचीत का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। हालांकि वायरल ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
डीलरों का आरोप, महीनों से मिल रहा कम अनाज :
पीडीएस विक्रेताओं का कहना है कि इस माह अधिकांश दुकानदारों को एक से दो क्विंटल तक कम खाद्यान्न मिला। एक दुकानदार ने आरोप लगाया कि 50 क्विंटल के आवंटन के बदले उसे केवल 49 क्विंटल अनाज दिया गया। उनका कहना है कि यह समस्या पिछले कई महीनों से जारी है और शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
एजीएम और ट्रांसपोर्टर ने एक-दूसरे पर लगाए आरोप :
मामले में तत्कालीन एजीएम मोहम्मद अलाउद्दीन ने गोदाम में चोरी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि खाद्यान्न की चोरी परिवहन के दौरान हो रही है। दूसरी ओर संबंधित ट्रांसपोर्टर रामाशंकर ने दावा किया कि गोदाम से माप-तौल के बाद ही खाद्यान्न दुकानों तक भेजा जाता है और गड़बड़ी गोदाम स्तर पर हो रही है। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब जांच एजेंसियों की निगाह पूरे नेटवर्क पर टिक गई है।
बड़े ट्रांसपोर्टरों की भूमिका भी चर्चा में :
जिला मुख्यालय में एफसीआई और एसएफसी के बीच परिवहन कार्य करने वाले कुछ बड़े ट्रांसपोर्टरों की भूमिका को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के अनुसार, कुछ ट्रांसपोर्टर 35 वाहनों का अनुबंध कराकर वास्तविक रूप से कम वाहनों से परिवहन कर कथित तौर पर अनाज की हेराफेरी करते हैं। विभागीय अधिकारियों और गोदाम पर कार्यरत मेंठो की मिलीभगत से यह नेटवर्क संचालित होने की भी चर्चा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जिले में इस पूरे मामले के सामने आने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जिलाधिकारी की निगरानी में होने वाली जांच केवल प्रखंड के गोदामो तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कथित ट्रांसपोर्टर गिरोह, डिजिटल कांटे की तकनीकी जांच, वायरल ऑडियो और खाद्यान्न आपूर्ति की पूरी श्रृंखला की भी पड़ताल की जाएगी।
पीडीएस संघ के जिला अध्यक्ष श्रीकृष्ण चौबे ने कहा कि यह मामला जन वितरण प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा है। उन्होंने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच टीम गठित कर डिजिटल कांटा, कथित इलेक्ट्रॉनिक चिप, रिमोट कंट्रोल और वायरल ऑडियो की तकनीकी जांच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध सख्त विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
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