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पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ डुमरांव में आक्रोश मार्च, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग


बक्सर । पेपर लीक की घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार के विरोध में सोमवार को डुमरांव नगर में छात्र-युवाओं का आक्रोश सड़कों पर देखने को मिला। भाकपा (माले), ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के संयुक्त बैनर तले आयोजित आक्रोश दिवस के तहत नगर के प्रमुख मार्गों पर जुलूस निकाला गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने की मांग उठाई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं डुमरांव के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने की। वहीं सभा का संचालन भाकपा (माले) के केंद्रीय कमेटी सदस्य सह बक्सर जिला सचिव नवीन कुमार ने किया। इस दौरान धर्मेंद्र सिंह यादव, बाबूलाल राम समेत कई नेताओं ने अपने विचार रखे।

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की उठी मांग

प्रदर्शन के दौरान "शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो", "एनटीए को भंग करो", "नई शिक्षा नीति 2020 वापस लो" और "पेपर लीक पर जवाबदेही तय करो" जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। जुलूस नगर पालिका कार्यालय के समक्ष पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया।

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि देशभर में छात्र-युवा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि हजारों छात्र-युवा अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो लोकतंत्र में जनभागीदारी का प्रतीक है।



सरकार संवाद का रास्ता अपनाए

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से कई छात्र मानसिक तनाव का शिकार हुए हैं। नेताओं ने केंद्र सरकार से आंदोलनरत छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।

सभा में यह भी कहा गया कि जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्र-युवा और शिक्षाविद अपनी मांगों को लेकर लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से सार्थक पहल नहीं की गई है। वक्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए सरकार से संवेदनशील रवैया अपनाने की मांग की।

इथेनॉल नीति और महंगाई पर भी सरकार को घेरा

वक्ताओं ने नई शिक्षा नीति 2020 को छात्रों के हितों के प्रतिकूल बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। साथ ही परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के पुनर्गठन या भंग करने की मांग दोहराई। पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने ईंधन की कीमतों और इथेनॉल मिश्रण नीति को लेकर भी केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि आम जनता पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।





चेतावनी: मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा तेज

आक्रोश मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने "मोदी सरकार शर्म करो", "आंदोलनकारी छात्र-युवाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाओ" और "बेहतर भविष्य के लिए छात्र-युवाओं का संघर्ष जिंदाबाद" जैसे नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

इस मौके पर आइसा जिला सचिव अखिलेश ठाकुर, अंबेडकर छात्रावास के अध्यक्ष लक्ष्मण भारती, आरवाईए नेता बाबूलाल राम, रिंकू कुरैशी, सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष यादव, मुखिया कृष्णा राम, देवेंद्र कुशवाहा, बंटी पटेल, मनोज राम, अरविंद यादव, शैलेन्द्र पासवान, नासिर हसन सहित बड़ी संख्या में छात्र-युवा एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे।






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