बक्सर । आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पावन हरिशयनी (देवशयनी) एकादशी इस वर्ष शनिवार, 25 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। इस संबंध में बक्सर के विद्वान आचार्य बिमलेश ओझा जी महाराज ने श्रद्धालुओं को व्रत और पारण का समय बताते हुए धार्मिक महत्व की जानकारी दी।
आचार्य बिमलेश ओझा ने बताया कि हरिशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना तथा व्रत का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन से भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और यहीं से चातुर्मास का आरंभ होता है। इस अवधि में मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है तथा साधना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व माना जाता है।
उन्होंने बताया कि हरिशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई (शनिवार) को रखा जाएगा, जबकि व्रत का पारण अगले दिन रविवार, 26 जुलाई को प्रातः 10 बजे से पहले कर लेना शुभ रहेगा।
आचार्य ने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा, व्रत एवं दान-पुण्य कर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना करने का आह्वान किया।
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