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तुलसी आश्रम को पर्यटन स्थल बनाने की कवायद तेज, सरकारी स्तर पर तुलसी महोत्सव आयोजन की मांग पर बढ़ी पहल



बक्सर । जिले के रघुनाथपुर स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व के तुलसी आश्रम को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। साथ ही इस पावन स्थल पर प्रतिवर्ष सरकारी स्तर पर तुलसी महोत्सव आयोजित कराने की मांग को लेकर भी संबंधित विभागों ने आवश्यक प्रक्रिया शुरू कर दी है।

यह पहल मुख्यमंत्री सचिवालय के सहयोग पोर्टल पर सामाजिक कार्यकर्ता एवं तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश कुमार ओझा द्वारा दर्ज कराए गए आवेदन के बाद आगे बढ़ी है। आवेदन के आलोक में जिला प्रशासन तथा विभिन्न विभागों ने आवश्यक सूचनाओं और प्रतिवेदनों के संकलन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है।

जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय, बक्सर ने अनुमंडल पदाधिकारी, डुमरांव सहित संबंधित अधिकारियों से तुलसी आश्रम के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व पर विस्तृत मंतव्य उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी स्तर पर तुलसी महोत्सव के आयोजन तथा अन्य विकासात्मक योजनाओं पर विचार करने से पूर्व स्थल की विरासत और सांस्कृतिक पहचान के संबंध में आवश्यक अभिमत प्राप्त किया जाना जरूरी है।

वहीं पर्यटन विभाग, बिहार सरकार तथा बक्सर सदर विधायक आनंद मिश्र की अनुशंसा के आधार पर जिला प्रशासन ने भी आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। जिला पदाधिकारी द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी, डुमरांव को भेजे गए पत्र में भूमि संबंधी अभिलेख, स्थल का नक्शा, अनापत्ति प्रमाण-पत्र, रखरखाव की व्यवस्था तथा पर्यटन विकास की संभावनाओं से जुड़ी विस्तृत जानकारी निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।



जिला सामान्य शाखा की ओर से जारी पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि पर्यटन विभाग द्वारा पूर्व में मांगी गई कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां अब तक प्राप्त नहीं हो सकी हैं। इसके मद्देनजर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रतिवेदन शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि प्रस्ताव को आगे की स्वीकृति एवं विभागीय कार्रवाई के लिए अग्रसारित किया जा सके।

गौरतलब है कि रघुनाथपुर स्थित तुलसी आश्रम क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और ऐतिहासिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं एवं उपलब्ध ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार यह स्थल गोस्वामी तुलसीदास की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। माना जाता है कि उन्होंने यहां निवास करते हुए रामचरितमानस के उत्तरकांड के कुछ अंशों की रचना की थी। बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित शाहाबाद गजेटियर में भी उनके रघुनाथपुर प्रवास का उल्लेख मिलता है।

आश्रम परिसर में तुलसीदास जी के नाम से दर्ज लगभग 4 एकड़ 63 डिसमिल भूमि है। यहां स्थित प्राचीन राम-जानकी मंदिर एवं महाकालेश्वर मंदिर धार्मिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। प्रतिवर्ष रामनवमी पर रामोत्सव, सावन माह में गंगा महाआरती तथा दो दिवसीय तुलसी महोत्सव का आयोजन श्रद्धापूर्वक किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक भाग लेते हैं।






क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों का लंबे समय से यह आग्रह रहा है कि तुलसी आश्रम को राज्य एवं राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर उचित पहचान दिलाई जाए। उनका मानना है कि यदि इस स्थल का समुचित विकास किया जाता है और सरकारी स्तर पर तुलसी महोत्सव का नियमित आयोजन शुरू होता है, तो इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही पर्यटन, स्थानीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रशासनिक स्तर पर चल रही इस पहल से क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी है कि निकट भविष्य में तुलसी आश्रम को उसकी ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा के अनुरूप व्यापक पहचान और विकास का अवसर प्राप्त होगा।







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