बक्सर । बक्सर जिले के इटाढ़ी रेलवे गुमटी पर लगभग 26.40 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के उद्घाटन के महज 10 दिन बाद ही इसके एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने पर बहुजन शोषित समाज संघर्ष समिति (बीएस4) बहुजन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल कुमार ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस घटना को बिहार में व्याप्त भ्रष्टाचार, निर्माण कार्यों में लापरवाही और जवाबदेही की कमी का परिणाम बताया है।
अनिल कुमार ने कहा कि जनता के टैक्स के पैसे से बनने वाली करोड़ों रुपये की परियोजनाएं यदि उद्घाटन के कुछ दिनों के भीतर ही क्षतिग्रस्त होने लगें, तो यह केवल तकनीकी विफलता नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक और निर्माण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई, जिसके कारण पुल का स्लैब धंस गया।
गौरतलब है कि पुल के पांचवें पाये के ऊपर का स्लैब धंसने के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से पुल पर आवागमन रोक दिया और क्षतिग्रस्त हिस्से को लोहे की प्लेटों से ढंक दिया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
बीएस4 प्रमुख ने कहा कि स्थानीय लोगों द्वारा साझा की गई तस्वीरों और वीडियो में कंक्रीट की गुणवत्ता तथा सरियों की मजबूती को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि दोषी निर्माण एजेंसी, निगरानी अधिकारियों तथा संबंधित विभागीय पदाधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिहार में हाल के वर्षों में पुल, सड़क और अन्य निर्माण परियोजनाओं में लगातार अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहे हैं, जिससे जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है। अनिल कुमार ने राज्य सरकार, स्थानीय सांसद और विधायक पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिस पुल का उद्घाटन जनप्रतिनिधि अपनी उपलब्धि बताकर करते हैं, उसकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर बनती है।
उन्होंने कहा कि यह सौभाग्य की बात है कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, अन्यथा एक बड़ा हादसा हो सकता था। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास कार्यों के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई को बर्बाद किया जा रहा है।
कटाक्ष करते हुए अनिल कुमार ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो बिहार में पुल और आरओबी सीमेंट, कंक्रीट और सरिया से नहीं, बल्कि हवाई सपनों और कागजी दावों से बनाए जा रहे हैं। जिस गति से पुल और पुलिया निर्माण में खामियां सामने आ रही हैं, वह बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि पूरे मामले की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाए। उन्होंने कहा कि विकास केवल उद्घाटन और शिलान्यास से नहीं, बल्कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही से होता है। यदि करोड़ों रुपये की लागत से बना पुल 10 दिन भी सुरक्षित नहीं रह पाता, तो यह पूरे सिस्टम के लिए गंभीर चेतावनी है।
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