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वट सावित्री पूजा पर महिलाओं ने मांगा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद, भाजपा महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष कंचन देवी ने बताया व्रत और वट वृक्ष का महत्व


बक्सर । जिलेभर में शनिवार को वट सावित्री पूजा श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाई गई। सुबह से ही नवविवाहिताओं से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक की भीड़ विभिन्न वट वृक्षों के नीचे उमड़ पड़ी। महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। पूजा स्थलों पर पारंपरिक गीत, मंत्रोच्चार और पूजा-पाठ से वातावरण भक्तिमय बना रहा।



इस अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष कंचन देवी ने वट सावित्री व्रत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन धर्म में प्रकृति पूजा की परंपरा ऋग वैदिक काल से चली आ रही है। उन्होंने कहा कि वट वृक्ष को आयु वृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। माता सावित्री द्वारा यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाने की कथा इस व्रत की प्रमुख आस्था का आधार है। इसी कारण महिलाएं पूरे श्रद्धाभाव के साथ यह व्रत रखती हैं।

स्थानीय पंडितों के अनुसार अमावस्या तिथि होने के कारण पूरे दिन पूजा के लिए शुभ संयोग बना रहा। सुबह से ही महिलाओं का पूजा स्थलों पर पहुंचना शुरू हो गया था, जो दोपहर तक जारी रहा। महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर कच्चा धागा बांधा और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।





पूजा के दौरान कई महिलाओं ने वट वृक्ष के पत्तों से पारंपरिक श्रृंगार भी किया। पौराणिक मान्यता के अनुसार माता सावित्री ने यमराज के समक्ष जाते समय वट वृक्ष के पत्तों से श्रृंगार किया था। उसी परंपरा को आज भी महिलाएं निभाती आ रही हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार माता सावित्री के तप, त्याग और संकल्प के प्रभाव से उनके नेत्रहीन सास-ससुर की आंखों की रोशनी वापस लौट आई थी तथा पति सत्यवान को नया जीवन मिला था। यही कारण है कि आधुनिक समय में भी महिलाओं की इस व्रत और पूजा के प्रति गहरी आस्था बनी हुई है।







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