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कांट गांव के चेक डैम तोड़े जाने पर बवाल, जल संकट और प्रशासनिक जवाबदेही पर उठे सवाल ! जांच में मानवीय हस्तक्षेप की पुष्टि, पुनर्निर्माण व दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज


बक्सर । ब्रह्मपुर प्रखंड अंतर्गत कांट गांव स्थित चेक डैमों को ध्वस्त किए जाने का मामला अब गंभीर प्रशासनिक एवं पर्यावरणीय मुद्दा बन गया है। पर्यावरण कार्यकर्ता शैलेश ओझा की शिकायत पर भूमि संरक्षण विभाग द्वारा किए गए स्थल निरीक्षण में यह संकेत मिले हैं कि डैमों को योजनाबद्ध तरीके से क्षतिग्रस्त किया गया, जिससे क्षेत्र की जल संचयन व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित औद्योगिक इकाई ने ‘सफाई अभियान’ के नाम पर जेसीबी मशीनों से दो महत्वपूर्ण चेक डैमों को तोड़ दिया। ये डैम सैकड़ों किसानों की सिंचाई के मुख्य स्रोत थे, साथ ही मवेशियों और वन्य जीवों के लिए भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करते थे। इनके ध्वस्तीकरण से क्षेत्र में जल संकट गहरा गया है और स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल असर पड़ा है।




निरीक्षण के दौरान भूमि संरक्षण विभाग के कनीय अभियंता तबरेज आलम और कृषि पदाधिकारी श्याम गुप्ता ने पाया कि दोनों डैम पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं। प्रारंभिक जांच में इसे मानवीय हस्तक्षेप का परिणाम बताया गया है, जो सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की श्रेणी में आता है। एक डैम भोजपुर-बक्सर सीमा पर छेरा नदी पर स्थित था, जबकि दूसरा बक्सर जिले के भीतर था। मामले की विस्तृत रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को सौंपी जा रही है।

गौरतलब है कि पूर्व में लघु सिंचाई विभाग के कनीय अभियंता ज्ञान रंजन शर्मा ने भी बिना अनुमति डैम तोड़े जाने की पुष्टि की थी, लेकिन बाद में विभाग ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताकर पल्ला झाड़ लिया। इस विरोधाभासी रुख ने प्रशासनिक निष्क्रियता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।




शैलेश ओझा के अनुसार, डैमों के टूटने से भीषण गर्मी में किसानों, चरवाहों, मवेशियों और वन्य जीवों के लिए जल संकट उत्पन्न हो गया है। साथ ही प्राकृतिक जलधारा के प्रवाह में बदलाव से पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है।

प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई न होने से मामला अब ‘लोक शिकायत निवारण’ के तहत दर्ज कराया गया है। शिकायत में उच्चस्तरीय जांच, दोषियों की पहचान, कठोर कार्रवाई और क्षतिग्रस्त डैमों के पुनर्निर्माण की मांग की गई है।

यह मामला अब जनचर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है। स्थानीय लोग और पर्यावरण प्रेमी प्रशासन से पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकें।






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