बक्सर । व्यवहार न्यायालय बक्सर से एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है, जिसमें करीब 31 वर्ष पुराने भूमि विवाद में बेटी के अधिकार को न्यायिक मान्यता मिली है। जिला जज-IV अनुपम कुमारी की अदालत ने टाइटल अपील संख्या 07/1995 में निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए एतवरिया देवी के पक्ष में निर्णय सुनाया।
मामला कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के छतनवार गांव का है। एतवरिया देवी ने अपने पिता मेघराज सिंह द्वारा 16 जुलाई 1984 को अपने पक्ष में किए गए पंजीकृत उपहार (गिफ्ट) विलेख को वैध बताते हुए न्यायालय में वाद दायर किया था। उनका कहना था कि पिता ने उनकी सेवा-सुश्रुषा से प्रसन्न होकर जमीन उपहार स्वरूप दी थी, जिसके बाद उनका नाम दाखिल-खारिज एवं चकबंदी अभिलेखों में दर्ज हो गया था।
बाद में पिता द्वारा 26 अगस्त 1986 को उक्त गिफ्ट डीड को रद्द करने का दस्तावेज तैयार कराया गया और इसी आधार पर वर्ष 1989 में अन्य व्यक्तियों के पक्ष में बिक्री विलेख कर दिए गए। निचली अदालत ने एतवरिया देवी की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने अपील दायर की।
अपील की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि एक बार विधिवत पंजीकृत, स्वीकार और क्रियान्वित उपहार विलेख को दाता अपनी इच्छा से रद्द नहीं कर सकता। न्यायालय ने गिफ्ट डीड को वैध, वास्तविक और विधिसम्मत मानते हुए बाद में किए गए रद्दीकरण और बिक्री विलेखों को कानूनन शून्य करार दिया।
अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि “एक पूर्ण और बिना शर्त उपहार को एकतरफा रद्द नहीं किया जा सकता। जब संपत्ति का स्वामित्व विधिवत हस्तांतरित हो चुका हो, तब दाता का उस पर पुनः दावा स्वीकार्य नहीं है।”
फैसले में 26 अगस्त 1986 की रद्दीकरण विलेख तथा 20 मार्च 1989 और 19 जून 1989 की बिक्री विलेखों को शून्य, अवैध और निरस्त घोषित किया गया। साथ ही प्रतिवादियों को एतवरिया देवी के कब्जे में हस्तक्षेप करने से स्थायी रूप से रोक दिया गया है।
यह निर्णय न केवल संपत्ति विवादों में पंजीकृत उपहार विलेख की वैधता को मजबूत करता है, बल्कि पारिवारिक संपत्ति मामलों में भी एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है।
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