बक्सर । चौसा थर्मल पावर प्लांट से जुड़े ठेकेदारी विवाद में बनारपुर गांव में हुई फायरिंग की घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। गुरुवार की सुबह आक्रोशित ग्रामीणों ने चौसा-मोहनिया मार्ग को जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने बुधवार देर रात बनारपुर निवासी आलोक तिवारी को गिरफ्तार करने के दौरान नियमों की अनदेखी की। उनका कहना है कि आधी रात को घर का दरवाजा और खिड़की तोड़कर की गई कार्रवाई न केवल गैरकानूनी थी, बल्कि इससे गांव में भय और तनाव का माहौल बन गया है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि बनारपुर गांव के साथ हमेशा कठोर व्यवहार किया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि छोटी-छोटी घटनाओं में भी पुलिस घरों में तोड़फोड़ करती है और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है।
गांव के किसान मुन्ना तिवारी ने कहा कि पुलिस कमजोर और किसानों पर त्वरित कार्रवाई करती है, जबकि दबंग प्रवृत्ति के लोगों पर नरमी बरती जाती है। उन्होंने आनंद राय पर अवैध खनन और मिट्टी ढुलाई के आरोप लगाते हुए कहा कि विरोध करने पर दिनदहाड़े गोलीबारी जैसी घटनाएं होती हैं, लेकिन पुलिस सख्ती नहीं दिखाती।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच वरीय अधिकारियों की मौजूदगी में कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं, मुफस्सिल थानाध्यक्ष शम्भु भगत ने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी भी दबाव में काम नहीं करती है। उन्होंने कहा कि फायरिंग मामले में दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज की गई है और विधि-सम्मत कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है।
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