बक्सर । सरस्वती विद्या मंदिर, अहिरौली में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आयोजित तीन दिवसीय आचार्य कार्यशाला का शुभारंभ रविवार को माँ सरस्वती की वंदना के साथ हुआ। कार्यशाला 29 से 31 मार्च तक आयोजित की जा रही है, जिसमें विद्यालय के आचार्यगण सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
प्रथम सत्र में विद्यालय के प्राचार्य मनोरंजन कुमार ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक परिवेश के अनुरूप अपनी शिक्षण पद्धति को निरंतर उन्नत करते रहना चाहिए।
इस अवसर पर भोजपुर विभाग के विभाग प्रमुख लाल बाबू प्रसाद ने प्रेरक प्रसंगों के माध्यम से आचार्यों को उनके कर्तव्यों और दायित्वों की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि आचार्य का दायित्व केवल पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मार्गदर्शक की भूमिका निभाना भी है।
कार्यशाला के दौरान स्वाध्याय के महत्व पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आचार्यों को समयबद्ध पाठ-योजना के साथ कक्षा में प्रवेश कर छात्रों को विषय की पूर्ण समझ प्रदान करनी चाहिए, ताकि शिक्षा प्रभावी और परिणामोन्मुखी बन सके।
द्वितीय सत्र में गणित विषय के अध्यापन की विभिन्न तकनीकों और विधियों पर विस्तृत व्याख्यान दिया गया। इसमें इस बात पर विशेष बल दिया गया कि कठिन विषयों को सरल उदाहरणों और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ाने से विद्यार्थियों की समझ बेहतर होती है और उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि आगामी दो दिनों में विभिन्न विषयों की अध्यापन पद्धतियों, मूल्यांकन प्रणाली और व्यक्तित्व विकास से जुड़े विषयों पर भी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे आचार्यों की शैक्षणिक दक्षता और प्रभावशीलता में वृद्धि हो सके।
................. ................. ............... ..............
Send us news at: buxaronlinenews@gmail.com
ख़बरें भेजें और हम पहुंचाएंगे,
आपकी खबर को सही जगह तक...
















0 Comments