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गोसाईंपुर में श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ, पहले दिन भव्य जलभरी शोभायात्रा



बक्सर । जिले के गोसाईंपुर ग्राम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन गुरुवार को भव्य शोभायात्रा (जलभरी) निकाली गई। बैंड-बाजे के साथ निकली इस शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। महिलाओं ने सिर पर कलश रखकर यात्रा की शुरुआत की। भजन-कीर्तन पर झूमते भक्तों और भगवान के नाम के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। युवाओं के उत्साहपूर्ण नारों ने गांव को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।

कथा के प्रथम दिवस पर आचार्य रणधीर ओझा ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भागवत पुराण का मूल उद्देश्य जीव को ईश्वर से जोड़ना और उसके जीवन में दिव्यता का संचार करना है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि “भगवान का साक्षात स्वरूप” है, जिसका श्रवण करना स्वयं भगवान से मिलने के समान है।




आचार्य श्री ने सत्संग के अर्थ और महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि “सत्संग” का अर्थ है ‘सत्’ अर्थात सत्य, परमात्मा या सद्गुणों के साथ संग — यानी ऐसे विचारों, व्यक्तियों और वातावरण के साथ रहना जो हमें भगवान की ओर ले जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्संग केवल साधु-संतों के पास बैठना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से भगवान की चर्चा और भक्ति में जुड़ जाना ही सच्चा सत्संग है।

सत्संग के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इससे मन की शुद्धि होती है। जैसे जल से गंदे वस्त्र स्वच्छ हो जाते हैं, वैसे ही सत्संग रूपी अमृत से मन के विकार धुल जाते हैं। उन्होंने बताया कि सत्संग से व्यक्ति के संस्कारों में परिवर्तन आता है और उसका झुकाव सांसारिक विषयों से हटकर भगवान, भक्ति और सेवा की ओर होने लगता है।







आचार्य श्री ने कहा कि सत्संग व्यक्ति के आचार-विचार और जीवन दृष्टि को बदलने का सशक्त माध्यम है। भगवान के चरित्र और भक्तों के जीवन से प्रेरणा लेकर व्यक्ति अपने कर्मों में सुधार कर सकता है तथा मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्संग का वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब उसे जीवन में उतारा जाए। यह न केवल आध्यात्मिक ज्ञान देता है, बल्कि मनोबल बढ़ाने और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में भी सहायक होता है।

आयोजक बबन उपाध्याय ने बताया कि यह श्रीमद् भागवत कथा 19 फरवरी से 25 फरवरी 2025 तक प्रतिदिन अपराह्न 3:30 बजे से संध्या 7:00 बजे तक आयोजित की जाएगी। श्रद्धालुओं से अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ उठाने की अपील की गई है।








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