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मुरार में 150 साल पुराना धरोहर कुआं को जेसीबी से पाटे जाने पर ग्रामीणों में आक्रोश, प्रशासन से बचाने की मांग


बक्सर । जिले के चौगाई प्रखंड अंतर्गत मुरार हाईस्कूल के पीछे स्थित शिव मंदिर के पास करीब 150 वर्ष पुराना ऐतिहासिक कुआं इन दिनों विवादों में घिर गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग निजी लाभ के उद्देश्य से जेसीबी मशीन लगाकर इस धरोहर कुएं को मिट्टी भरकर समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।



बताया जाता है कि यह कुआं कभी पूरे गांव की प्यास बुझाने का प्रमुख स्रोत था। आज भी पूजा-अर्चना के अवसर पर शिव मंदिर में जल चढ़ाने के लिए इसी कुएं का धार्मिक महत्व बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार जहां जल जीवन हरियाली योजना के तहत पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का अभियान चला रही है, वहीं इस प्रकार ऐतिहासिक कुएं को पाटना योजना की मंशा के विपरीत है।

स्थानीय लोगों के अनुसार राजस्व अभिलेखों में मौजा मुरार, खाता संख्या 565, खेसरा संख्या 1221 एवं 1223 में उक्त कुएं का स्पष्ट उल्लेख है। इसके बावजूद बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कुएं को भरने का कार्य किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।






ग्रामीणों ने बताया कि यह ऐतिहासिक कुआं संविधान सभा के अध्यक्ष रहे डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा के पूर्वजों द्वारा बनवाया गया था। यहां तक कि मुरार हाईस्कूल का निर्माण कार्य भी इसी कुएं के पानी से संपन्न हुआ था, जिससे इसकी ऐतिहासिक और सामाजिक महत्ता और बढ़ जाती है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि कुएं को भरने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए इस ऐतिहासिक जल स्रोत को तत्काल संरक्षित करने का निर्देश दिया जाए, ताकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत पुराने जल स्रोतों को बचाने का संकल्प साकार हो सके।







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