बक्सर । बाबा बरमेश्वर नाथ की नगरी ब्रह्मपुर में आयोजित ऐतिहासिक फागुनी पशु मेला में इस वर्ष भी घोड़ा दौड़ प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही। मेले में दूर-दराज से आए घोड़ा मालिकों, व्यापारियों और दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। रोमांच और उत्साह से भरे इस आयोजन को शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया।
इस बार प्रतियोगिता का आयोजन पूर्व जिला परिषद सदस्य सह मेला मालिक स्व. मार्कण्डेय सिंह की स्मृति में उनके बड़े पुत्र, बहुराज्यीय सहकारी भूमि बैंक समिति के बिहार-झारखंड निदेशक भारत भूषण सिंह के नेतृत्व में कराया गया। मेला परिसर में व्यापारी संघ एवं घोड़ा मालिकों ने सर्वसम्मति से भव्य घोड़ा रेस प्रतियोगिता आयोजित की, जिसमें तीन दर्जन से अधिक घोड़े एवं घोड़ियों ने भाग लिया।
मुख्य घोड़ा दौड़ प्रतियोगिता में पटना के रुदल गोप ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनके घोड़े “बाबर” के घुड़सवार मेघु रहे, जिन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया। द्वितीय पुरस्कार रघुनाथपुर, बेगूसराय के प्रिंस यादव को मिला। उनके घोड़े “रघुनाथपुर एक्सप्रेस” के घुड़सवार राजेश यादव ने कड़ी टक्कर दी। तृतीय स्थान गंगौली, बक्सर के योगेंद्र ठाकुर को मिला, जिनके घोड़े के घुड़सवार गूंगा रहे।
विशेष पुरस्कार के रूप में केशोवपुर, बक्सर के छोटू मुखिया को सम्मानित किया गया। उनके घोड़े “वीरु” के घुड़सवार मनीष कुमार रहे। प्रतियोगिता के दौरान घोड़े की चुस्ती-फुर्ती और संतुलन ने दर्शकों का मन मोह लिया।
इसके अलावा “दो दांत” वर्ग की अलग दौड़ प्रतियोगिता भी आयोजित हुई। इसमें धामनिया, आरा के पुतुल चौबे का घोड़ा प्रथम रहा। द्वितीय स्थान अशोक ठेकेदार के घोड़े को मिला, जबकि तृतीय स्थान गौड़ाढ, शाहपुर के शंभू पासवान के घोड़े ने प्राप्त किया।
घोड़ी वर्ग की रेस भी मेले का विशेष आकर्षण रही। नियाज़ीपुर के हीरा यादव की घोड़ी ने प्रथम स्थान हासिल किया। द्वितीय पुरस्कार ढाबी के रामचंद्र यादव की घोड़ी को मिला, जबकि तृतीय स्थान तूफान सिंह की घोड़ी ने प्राप्त किया।
छोटी “छकरी” (बच्चा घोड़ा/घोड़ी) दौड़ प्रतियोगिता ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। इसमें धामनिया, आरा के पुतुल चौबे ने प्रथम पुरस्कार जीता। द्वितीय स्थान केशवपुर के छोटू मिश्रा मुखिया को मिला, जबकि तृतीय पुरस्कार सिसई, सिवान के विजय यादव की घोड़ी को प्रदान किया गया।
सभी प्रतियोगिताएं पांच-पांच राउंड में कराई गईं, जिससे प्रतिस्पर्धा और भी रोमांचक बन गई। प्रत्येक राउंड में घुड़सवारों ने अपनी कला, संतुलन और घोड़ों की रफ्तार का बेहतरीन प्रदर्शन किया। आयोजन स्थल पर सुरक्षा एवं भीड़ नियंत्रण के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
व्यापारी संघ एवं घोड़ा मालिकों ने बताया कि इस तरह की प्रतियोगिताएं न केवल मेले की परंपरा को जीवित रखती हैं, बल्कि घोड़ा पालन एवं व्यापार को भी बढ़ावा देती हैं। विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया और तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उनका उत्साहवर्धन किया गया।
ऐतिहासिक फागुनी पशु मेला में आयोजित यह घोड़ा दौड़ प्रतियोगिता परंपरा, रोमांच और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम बनकर एक बार फिर सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
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