Ad Code

नौनिहाल इकरा ने कर्बला परिसर में पौधारोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, पौधारोपण पृथ्वी एवं जीवन की रक्षा का सबसे सशक्त माध्यम : शैलेश ओझा



बक्सर । पर्यावरण संरक्षण गतिविधि दक्षिण बिहार के कार्यकर्ताओं द्वारा रघुनाथपुर स्थित कर्बला परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और पौधारोपण को जन–आंदोलन के रूप में स्थापित करना रहा।



इस अवसर पर नौनिहाल इकरा ने पर्यावरण कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर तुलसी, खजूर, नारियल और आम सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया। छोटी बच्ची द्वारा किए गए इस पौधारोपण ने लोगों को प्रकृति संरक्षण का भावनात्मक संदेश दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण गतिविधि दक्षिण बिहार के जन संवाद प्रमुख शैलेश ओझा ने कहा कि हिंदू धर्म में पेड़ों को जीवनदाता, देवस्वरूप और पूजनीय माना गया है, वहीं इस्लाम धर्म में पौधारोपण को सबसे बड़ी इबादत और सदका–ए–जारिया यानी निरंतर पुण्य प्राप्त करने का माध्यम बताया गया है। उन्होंने कहा कि पौधारोपण पृथ्वी एवं जीवन की रक्षा के लिए सबसे बेहतरीन उपायों में से एक है। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाना और उनका संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से जन्मदिन, विवाह, सालगिरह जैसे विशेष अवसरों पर एक पौधा अवश्य लगाने की अपील की।



शंभू चंद्रवंशी ने कहा कि पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए नियमित रूप से पौधारोपण जरूरी है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी उनकी देखभाल और सुरक्षा करना है। वहीं सलीम दुर्रानी ने कहा कि हरियाली अल्लाह की निशानी है। इस्लाम में पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। हदीस के अनुसार यदि कयामत करीब हो और हाथ में पौधा हो, तो उसे भी लगा देना चाहिए। पैगंबर मोहम्मद ने फरमाया है कि यदि कोई मुसलमान पेड़ लगाता है और उसका फल इंसान, पक्षी या जानवर खाते हैं, तो वह उसके लिए सदका यानी दान बन जाता है।

पौधारोपण कार्यक्रम में शैलेश ओझा, शंभू चंद्रवंशी, पंडित राजू मिश्रा, सलीम दुर्रानी, मोहम्मद राजू, इकरा, विकास कुमार, रवि, उमेश सहित कई पर्यावरण कार्यकर्ता उपस्थित रहे।







................. ................. ............... ..............
Send us news at: buxaronlinenews@gmail.com
ख़बरें भेजें और हम पहुंचाएंगे, 
आपकी खबर को सही जगह तक...





 





Post a Comment

0 Comments

Close Menu