बक्सर । बिहार विधानसभा चुनाव सम्पन्न होने से पहले तक बक्सर में सनातन धर्म पर मानो सबसे बड़ा संकट आ गया हो- ऐसा माहौल बनाने वाले एक धर्म योद्धा इन दिनों रहस्यमय तरीके से लापता हैं। वही धर्म योद्धा, जो चुनाव से ठीक पहले सनातन बचाने की चिंता में दिन-रात एक किए हुए थे, अब ऐसे गायब हैं जैसे धर्म नहीं, टिकट ही मोक्ष था।
राष्ट्रीय राजमार्ग 922 पर अहिरौली मोड़ के समीप बड़े तामझाम के साथ धर्म योद्धा के करकमलों से तथाकथित “प्रधान कार्यालय” का उद्घाटन हुआ था। लाउडस्पीकर से सनातन बचाने के नारे गूंजते थे, पोस्टर-बैनर सड़क से आसमान तक धर्म की दुहाई दे रहे थे। ऐसा लगता था मानो बक्सर में धर्म उनके बिना एक दिन भी नहीं टिक पाएगा।
लेकिन जैसे ही चुनाव में टिकट बंटवारे का दौर शुरू हुआ, धर्म योद्धा अचानक आध्यात्मिक वनवास पर चले गए। न धर्म दिखा, न योद्धा। उनके तथाकथित संगठन का हाल यह है कि कार्यालय से पोस्टर-बैनर, कुर्सी-टेबल सब कुछ ऐसे गायब हुआ जैसे कभी था ही नहीं। अब वहां सिर्फ ताले और जनता के सवाल लटके हुए हैं।
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं—
सनातन धर्म के ये स्वयंभू रक्षक चुनाव के बाद अचानक लापता क्यों हो गए? प्रधान कार्यालय पर ताला क्यों लटक गया? क्या धर्म बचाने की लड़ाई सिर्फ टिकट मिलने तक ही सीमित थी? कानाफूसी यह भी है कि शायद धर्म का वह धंधा नहीं चल पाया, जिससे विधायकी का टिकट मिलने की उम्मीद थी। अब धर्म सुरक्षित है या नहीं, यह तो पता नहीं- लेकिन इतना तय है कि चुनाव बाद धर्म योद्धा पूरी तरह सुरक्षित दूरी पर पहुंच चुके हैं।
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