बक्सर । चौसा रेलवे स्टेशन से जुड़ी वर्षों पुरानी जनसमस्याओं को लेकर प्रस्तावित अनशन एवं प्रदर्शन के मद्देनज़र सोमवार को चौसा रेलवे यात्री संघर्ष समिति की तैयारी समिति की बैठक कैंप कार्यालय, चौसा में आयोजित की गई। बैठक में स्टेशन पर महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव, यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाओं की बहाली सहित छह सूत्री मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान आगामी अनशन एवं प्रदर्शन की कार्ययोजना, कार्यक्रम संचालन तथा आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। समिति के अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार यादव ने कहा कि चौसा ऐतिहासिक, धार्मिक एवं औद्योगिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है, इसके बावजूद चौसा रेलवे स्टेशन की लगातार उपेक्षा की जा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि चौसा महर्षि च्यवन की तपोभूमि, शेरशाह सूरी की विजयस्थली तथा उत्तरायणी मां गंगा के पावन तट के रूप में प्रसिद्ध है। साथ ही 1320 मेगावाट क्षमता वाले चौसा थर्मल पावर प्लांट जैसी राष्ट्रीय महत्व की परियोजना भी यहां स्थित है। इसके बावजूद स्टेशन पर न तो पर्याप्त ट्रेनों का ठहराव है और न ही यात्रियों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे प्रतिदिन हजारों यात्रियों, छात्र-छात्राओं, मजदूरों एवं व्यापारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं गैर-राजनीतिक होगा और इसका उद्देश्य केवल यात्रियों के अधिकारों की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि जब तक चौसा रेलवे स्टेशन को उसका वाजिब अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
बैठक में लालजी राम, विनोद कुमार यादव, तेजनारायण यादव, श्रीभगवान राम, संजय राम, बबलू पाल, हवलदार चौधरी, सुनील कुमार राम, रामप्रवेश राजभर, वीरेंद्र राम, सदानंद राम, विजय राम, दिलबहार पासी, भरत पाण्डेय, विनय कानू, मुन्ना खरवार, कन्हैया मालाकार, रमेश चौधरी, कृष्णा मालाकार, नारायण माली, गोविन्द खरवार, श्रीमान नारायण पाण्डेय, बनारसी माली, शिवजी चौधरी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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