बक्सर । राजकीय अनुमंडलीय पुस्तकालय में भोजपुरी साहित्य मंडल के बैनर तले हिन्दी दिवस का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रो. रामनारायण तिवारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि प्रो. रामनारायण तिवारी ने कहा कि भाषा का लोक से संबंध समाप्त होने पर भाषा की समस्या उत्पन्न होती है। हिन्दी को लोक और शास्त्र दोनों से जुड़ा रहना चाहिए। अंग्रेजी के बढ़ते वर्चस्व के बीच हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हिन्दी के प्रति हीनभावना को समाप्त कर शास्त्रीयता के बजाय लोकोन्मुख भाषा की ओर बढ़ना होगा। उन्होंने भोजपुरी की लोक परंपरा और भाषा संबंधी नीतियों पर भी अपने विचार रखे।
अनुमंडल पदाधिकारी अविनाश कुमार ने कहा कि हिन्दी हमारी अस्मिता है और इसे आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने हिन्दी को वैज्ञानिक भाषा बताते हुए इसके व्यापक प्रयोग पर जोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. डॉ. अरुण मोहन भारवि ने की। उन्होंने कहा कि हिन्दी के सामने चाहे जितनी चुनौतियां हों, उसे विश्वभाषा बनने से कोई नहीं रोक सकता। यह भारत की आत्मा और भारतीयता की पहचान है।
महर्षि विश्वामित्र कॉलेज के प्राचार्य डॉ. कृष्ण कांत सिंह ने हिन्दी को वर्तमान और भविष्य की भाषा बताया। रोटरी क्लब, बक्सर के अध्यक्ष निर्मल सिंह ने कहा कि हमें गर्व है कि जिस भाषा को हम बोलते हैं, उसी भाषा में जीते भी हैं। उन्होंने हिन्दी को आजादी का शंखनाद बताया। प्रसिद्ध कवि कृष्ण कुमार ने कहा कि हिन्दी को किसी चुनौती का भय नहीं है और यह निरंतर आगे बढ़ रही है।
वरिष्ठ पत्रकार शुभनारायण पाठक ने लोक भाषाओं के प्रति सम्मान और हिन्दी के प्रति सजगता की आवश्यकता बताई। इस अवसर पर भोजपुरी साहित्य मंडल की ओर से अतिथियों को स्मृति-चिह्न एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत एसपीएस स्कूल उनवांस की छात्राओं श्रेया सिंह, नव्या सिंह और रानी द्वारा शिक्षिका जूही केशरी के निर्देशन में प्रस्तुत सरस्वती वंदना नृत्य नाटिका से हुई। छात्राओं की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। मंच संचालन भोजपुरी साहित्य मंडल के महासचिव डॉ. वैरागी प्रभाष चतुर्वेदी ने किया, जबकि संयोजक कुशध्वज सिंह मुन्ना एवं प्रवीण कुमार ओझा ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में कवि सम्मेलन आयोजित हुआ। इसमें शिवबहादुर पाण्डेय ‘प्रीतम’, संजय सागर, कुशध्वज सिंह मुन्ना, फारूक सैफी, रत्नेश ओझा ‘राही’, हृदयनारायण हेहर, राजारमण पाण्डेय, कामेश्वर पाण्डेय, वशिष्ठ पाण्डेय, भगवान पाण्डेय, घुरूहू प्रजापति, वैदेही श्रीवास्तव, कृष्णमुरारी राय, राममुरारी राय, राघवेंद्र प्रकाश ‘रग्घु’, अभय तिवारी, पंकज पाण्डेय, अमरेंद्र दुबे, कौशल शर्मा, प्रवीण कुमार ओझा, कृष्ण कुमार, राजीव उपाध्याय, सोनू दुबे, विमलेश तिवारी समेत अन्य कवियों ने काव्य पाठ कर समां बांध दिया।
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