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विभागीय खींचतान में पीस रही चौसा की जनता, आधी आबादी के सामने पेयजल संकट



दो पानी टंकियों के मोटर खराब, सैकड़ों घरों में पेयजलापूर्ति बाधित; नगर पंचायत और पीएचईडी के बीच जिम्मेदारी पर फंसा पेंच

बक्सर । नगर पंचायत चौसा में पेयजलापूर्ति व्यवस्था विभागीय खींचतान की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। नगर पंचायत क्षेत्र के दो महत्वपूर्ण एवं घनी आबादी वाले इलाकों में पानी टंकियों के मोटर खराब होने से सैकड़ों घरों के सामने गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। एक ओर खराब मोटरों की मरम्मत नहीं हो पा रही है, वहीं दूसरी ओर नगर पंचायत और पीएचईडी विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार, नगर पंचायत के वार्ड संख्या चार में दुर्गा मोड़ के समीप स्थित पीएचईडी की पानी टंकी का मोटर पिछले पांच दिनों से जला हुआ है। मोटर खराब होने के कारण इससे जुड़े करीब चार वार्डों के सैकड़ों घरों में पेयजलापूर्ति प्रभावित है। समस्या के समाधान के लिए स्थानीय लोग नगर पंचायत से लेकर पीएचईडी कार्यालय तक चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ती जा रही है।




इसी तरह वार्ड संख्या 11 के कनकनारायणपुर मोहल्ले में स्थित पीएचईडी की पानी टंकी का मोटर करीब डेढ़ महीने से खराब पड़ा है। लंबे समय से जलापूर्ति बाधित रहने के कारण मोहल्ले के लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। एक साथ दो टंकियों से जलापूर्ति ठप होने से नगर पंचायत क्षेत्र में पेयजल संकट और गहरा गया है।


पीएचईडी विभाग का कहना है कि पेयजलापूर्ति से संबंधित प्रभार नगर पंचायत को सौंप दिए गए हैं। ऐसे में खराब मोटरों की मरम्मत और जलापूर्ति बहाल करने की जिम्मेदारी नगर पंचायत की है।

वहीं, नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी का कहना है कि जले हुए मोटरों की समस्या का निराकरण फिलहाल पीएचईडी विभाग द्वारा ही किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इस मामले को जिलाधिकारी के समक्ष भी रखा गया है।




प्रभार हस्तांतरण को लेकर भी उठे सवाल

नगर पंचायत की ओर से बताया गया कि प्रभार हस्तांतरण के दौरान बिजली के बकाया बिल, मोटर संचालन में लगे कर्मियों की संख्या, उनके लंबित मानदेय समेत अन्य आवश्यक जिम्मेदारियों और संसाधनों का स्पष्ट लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया गया। ऐसे में दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो पा रही है और इसका असर सीधे पेयजलापूर्ति पर पड़ रहा है।

स्थानीय विधायक, सांसद और जिला प्रशासन को भी पेयजल संकट से अवगत कराया जा चुका है। बावजूद इसके अब तक समस्या का समाधान नहीं होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

पूर्व जिला परिषद सदस्य डॉ. मनोज कुमार यादव ने जिला प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पेयजल जनता की मूलभूत आवश्यकता है और विभागीय विवाद के कारण लोगों को पानी के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने दोनों खराब मोटरों की शीघ्र मरम्मत कर प्रभावित क्षेत्रों में नियमित पेयजलापूर्ति बहाल कराने की मांग की है।








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