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ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से बक्सर में राशन वितरण व्यवस्था प्रभावित, एसएफसी गोदामों पर लटका ताला


बक्सर । जिले में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) पर साफ दिखाई देने लगा है। जुलाई माह के खाद्यान्न की डोर स्टेप डिलीवरी पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे जिले के सभी प्रखंडों के एसएफसी गोदामों से राशन दुकानों तक खाद्यान्न नहीं पहुंच पा रहा है। हालात यह हैं कि कई एसएफसी गोदामों पर ताला लटका हुआ है और खाद्यान्न का उठाव पूरी तरह बंद है।




ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि उन्हें पिछले दस महीनों से भुगतान नहीं मिला है। बकाया राशि में वाहनों का किराया, डीजल खर्च और मजदूरों की मजदूरी समेत अन्य संचालन व्यय शामिल हैं। भुगतान नहीं मिलने से आर्थिक संकट गहरा गया है, जिसके विरोध में ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी है। इसके चलते जिले की राशन वितरण व्यवस्था चरमरा गई है।

हालांकि, नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर कुछ ट्रांसपोर्टर प्रतिनिधियों ने बताया कि विभाग की ओर से लगभग डेढ़ माह का भुगतान कर दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक-दो दिनों के भीतर दिसंबर माह तक का शेष बकाया भी जारी हो सकता है। प्रतिनिधियों ने कहा कि भुगतान प्रक्रिया आगे बढ़ते ही खाद्यान्न की डोर स्टेप डिलीवरी फिर से शुरू कर दी जाएगी।

इधर, फेयर प्राइस डीलर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष श्रीकृष्ण चौबे ने बताया कि जिले में अब तक लगभग 68 प्रतिशत लाभुकों के बीच जून माह का खाद्यान्न वितरण किया जा चुका है, जबकि करीब 32 प्रतिशत राशन कार्डधारी अब भी राशन मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि खाद्यान्न की सीमित उपलब्धता के कारण कई पीडीएस दुकानदारों को अगले माह का आवंटन मिलने के बाद ही पिछले माह का वितरण पूरा करना पड़ता है।






जानकारों का मानना है कि यदि जुलाई माह का खाद्यान्न समय पर पीडीएस दुकानों तक नहीं पहुंचा तो जून माह के शेष लाभुकों को राशन उपलब्ध कराना मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर हजारों गरीब परिवारों के सामने खाद्यान्न संकट खड़ा हो सकता है।

वहीं, ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का असर पैक्स व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। पैक्स अध्यक्ष निशांत कुमार सिंह ने बताया कि परिवहन ठप होने से पैक्स द्वारा सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) समय पर जमा नहीं किया जा रहा है। इससे पैक्स पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सीएमआर जमा नहीं होने पर कई पैक्स डिफॉल्टर घोषित हो सकते हैं। उन्होंने संबंधित विभाग से शीघ्र हस्तक्षेप कर परिवहन व्यवस्था बहाल कराने और भुगतान संबंधी समस्या का समाधान निकालने की मांग की है।







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