बक्सर । कहते हैं कि समय हर जख्म को भर देता है, लेकिन बक्सर जिले के राजपुर प्रखंड अंतर्गत अहियापुर गांव में बीते एक वर्ष से वक्त जैसे थम सा गया है। गांव की गलियों में आज भी सन्नाटा पसरा है और हर चौखट पर दर्द की दास्तान दिखाई देती है। 24 मई 2025 को हुए चर्चित ट्रिपल मर्डर कांड को एक वर्ष पूरा हो चुका है, लेकिन पीड़ित परिवारों की आंखों में आज भी इंसाफ की उम्मीद बाकी है। जिस गांव में कभी बच्चों की किलकारियां और लोगों की चहल-पहल सुनाई देती थी, वहां अब खौफ और मातम का माहौल कायम है।
मामूली विवाद ने ले लिया था खूनी रूप
24 मई 2025 की सुबह सड़क पर गिट्टी गिराने को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया था। आरोप है कि विवाद के बाद एक पक्ष ने हथियारों के साथ हमला बोल दिया और गांव गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। करीब दस मिनट तक चली अंधाधुंध फायरिंग में पांच लोगों को गोलियां लगी थीं, जिससे घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई थी।
तीन लोगों की हुई थी मौत, दो अब भी झेल रहे दर्द
इस खूनी संघर्ष में सुनील सिंह (40 वर्ष) और विनोद सिंह (50 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि वीरेंद्र सिंह (35 वर्ष) ने अस्पताल ले जाने के दौरान दम तोड़ दिया था। वहीं पूजन सिंह (40 वर्ष) और मंटू सिंह (35 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के एक वर्ष बाद भी दोनों सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे हैं और लगातार इलाज व मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं।
कई परिवारों की खुशियां हुईं उजाड़
इस नरसंहार ने कई परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। मृतक विनोद सिंह की पत्नी कलावती देवी और सुनील सिंह की पत्नी आशा देवी की मांग का सिंदूर उजड़ गया। दोनों महिलाओं की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वे आज भी इंसाफ की आस लगाए बैठी हैं। उनका कहना है कि एक साल गुजर जाने के बावजूद उन्हें अब तक पूरा न्याय नहीं मिला है।
अनाथ बेटे की आंखों में अब भी न्याय की उम्मीद
मृतक वीरेंद्र सिंह की पत्नी का पहले ही निधन हो चुका था। पिता की हत्या के बाद उनका बेटा अजीत यादव पूरी तरह अकेला पड़ गया। अजीत की आंखों में आज भी अपने पिता के हत्यारों को सजा दिलाने की उम्मीद दिखाई देती है। वह प्रशासन और न्यायपालिका की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है।
19 नामजद समेत 22 लोगों पर हुई थी प्राथमिकी
इस चर्चित हत्याकांड में पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष के पति मनोज यादव, पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष संतोष यादव समेत 19 नामजद और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। घटना के बाद पुलिस पर कार्रवाई का भारी दबाव बना था। कुर्की-जब्ती और इश्तहार की कार्रवाई शुरू होने के बाद मुख्य आरोपियों ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया था।
पांच आरोपी अब भी फरार
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के एक वर्ष बाद भी पांच नामजद आरोपी अब तक पुलिस गिरफ्त से बाहर हैं। इनमें जग नारायण सिंह, दीनानाथ सिंह, विकास यादव, अभिषेक यादव और शिवम यादव शामिल हैं। परिजनों का कहना है कि इन आरोपियों को उच्च न्यायालय से भी जमानत नहीं मिली है, बावजूद इसके पुलिस अब तक उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
गांव में अब भी दहशत का माहौल
अहियापुर गांव में आज भी लोग खुलकर इस घटना पर बात करने से कतराते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद से गांव का माहौल पूरी तरह बदल गया है। जहां पहले सामाजिक मेलजोल होता था, वहां अब लोग अपने घरों तक सीमित हो गए हैं। गांव में आज भी डर और तनाव का माहौल कायम है।
पीड़ित परिवारों का सवाल — आखिर कब मिलेगा पूरा न्याय?
घटना को एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन पीड़ित परिवारों का दर्द आज भी वैसा ही ताजा है। हर गुजरते दिन के साथ उनके मन में सिर्फ एक ही सवाल उठता है — आखिर उन्हें पूरा न्याय कब मिलेगा? अहियापुर की धरती पर बहा खून और परिवारों की चीखें आज भी लोगों के जेहन में जिंदा हैं। ग्रामीणों की मांग है कि सभी फरार आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी हो और पीड़ित परिवारों को शीघ्र न्याय मिले, ताकि इस दर्दनाक अध्याय का अंत हो सके।
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