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अधिवक्ताओं ने डीसीएलआर कोर्ट का किया सामुहिक बहिष्कार, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन


बक्सर । डुमरांव अनुमंडल अंतर्गत भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीसीएलआर) न्यायालय में कार्यप्रणाली से नाराज अधिवक्ताओं ने बुधवार को न्यायालय कार्य का बहिष्कार किया। एडवोकेट्स एसोसिएशन, डुमरांव के बैनर तले अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर विरोध जताया और अनुमंडल दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर अपनी शिकायतों से अवगत कराया।



एडवोकेट्स एसोसिएशन डुमरांव के अध्यक्ष दरोगा सिंह एवं महासचिव पृथ्वी नाथ शर्मा के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने बताया कि भूमि सुधार उपसमाहर्ता न्यायालय में लगातार नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे अधिवक्ताओं और वादकारियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि पूर्व के अभिलेखों को बिना पक्षकारों को नोटिस दिए और बिना अधिवक्ताओं को सूचना दिए न्यायालय पटल पर लाया जा रहा है।

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पूर्व के अभिलेखों को न्यायालय पटल पर लाने से पहले संबंधित अधिवक्ताओं से सीन नहीं कराया जाता, न ही न्यायालय कार्यालय में जमा लिखित बहस एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को अभिलेखों में संलग्न किया जाता है। कई मामलों में हाजिरी देने के बावजूद अभिलेखों में हाजिरी अंकित नहीं की जाती और साक्ष्य संलग्न नहीं होने का हवाला देकर वाद अस्वीकृत कर दिए जाते हैं। यहां तक कि एकपक्षीय अभिलेखों को भी खारिज किए जाने का आरोप लगाया गया है।

अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि न्यायालय में खुले रूप से यह कहा जाता है कि सेना के कानून के तहत न्यायालय का कार्य किया जाएगा और सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) एवं बिहार भूमि विवाद से संबंधित कानूनों को नहीं माना जाएगा। इससे अधिवक्ताओं में गहरा रोष है। इसके अलावा न्यायिक बिंदुओं पर अधिवक्ताओं से न्यायपूर्ण व्यवहार नहीं किए जाने, सुनवाई के दौरान न्यायालय छोड़कर चेंबर में चले जाने तथा न्यायालय कार्य बाधित करने के भी आरोप लगाए गए हैं।

एडवोकेट्स एसोसिएशन ने यह भी कहा कि अधिवक्ताओं को अभिलेखों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती और न्यायालय पटल पर अपनी बात रखने पर उनकी बात नहीं सुनी जाती। अधिवक्ताओं ने मांग की कि स्वतः संज्ञान (सोमोटो) से अस्वीकृत किए गए अभिलेखों को पुनः जीवित किया जाए तथा न्यायालय में अधिवक्ताओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जाए।
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक न्यायालय कार्य का बहिष्कार जारी रहेगा। ज्ञापन पर अध्यक्ष दरोगा सिंह, महासचिव पृथ्वी नाथ शर्मा, कोषाध्यक्ष दिलीप कुमार पासवान, संयुक्त सचिव कृष्ण बिहारी पाण्डेय, अंकेक्षक किरण कुमारी सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।







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