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जल संरक्षण और प्रकृति से आत्मीय जुड़ाव का संदेश देता है छठ महापर्व : शैलेश ओझा



छठ पूजा की पूर्व संध्या पर तुलसी आश्रम रघुनाथपुर स्थित तालाब की साफ-सफाई कर लिया गया जल स्रोतों की रक्षा का संकल्प

बक्सर । छठ पूजा की पूर्व संध्या पर सूर्य पूजा समिति तुलसी स्थान एवं पर्यावरण संरक्षण गतिविधि दक्षिण बिहार प्रांत के कार्यकर्ताओं ने तुलसी आश्रम रघुनाथपुर स्थित तालाब की साफ-सफाई कर जल स्रोतों के संरक्षण का संकल्प लिया।

इस अवसर पर संगठन के जनसंवाद सह प्रमुख शैलेश ओझा ने कहा कि छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानव और प्रकृति के बीच गहरे संबंध का प्रतीक है। यह पर्व हमें जल को पवित्र और स्वच्छ रखने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि जब तालाबों और नदियों में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है, तब छठ पूजा जल संरक्षण का सशक्त संदेश देती है।

गौरतलब है कि तुलसी आश्रम स्थित तालाब ग्रामीणों की आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां हर साल हजारों श्रद्धालु छठ व्रत करने आते हैं। बावजूद इसके, तालाब की स्थिति जर्जर बनी हुई है और प्रशासनिक लापरवाही के कारण इसकी उपेक्षा हो रही है।



ग्रामीणों का कहना है कि कभी गोस्वामी तुलसीदास जी ने यहीं प्रवास किया था और तालाब किनारे स्थित कुटिया में रहते हुए रामचरितमानस के उत्तरकांड की रचना की थी। इसके बावजूद यह धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल अपेक्षित विकास से वंचित है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021-22 में मनरेगा योजना के तहत लगभग ₹6.54 लाख की लागत से तालाब का सौंदर्यीकरण और पेवर ब्लॉक लगाने का कार्य हुआ था। इसके अलावा ग्राम पंचायत विकास निधि से तालाब के उत्तरी भाग में पक्का घाट बनाया गया, परंतु बाकी हिस्से में अब भी कच्चा घाट ही है, जिससे छठ व्रतियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

रघुनाथपुर के तत्कालीन मुखिया स्वर्गीय श्रीराम ओझा के प्रयासों से पहली बार तुलसी पथ का पक्कीकरण हुआ था। यह मार्ग 1.2 किलोमीटर लंबा है, जिसका केवल 300 मीटर हिस्सा पथ निर्माण विभाग द्वारा अनुरक्षित है, जबकि बाकी हिस्सा अब भी जर्जर अवस्था में है।



सूर्य पूजा समिति के सदस्य शैलेश ओझा, सनोज कुमार, विशाल सिंह, आनंद शर्मा, अनिरुद्ध कुमार, ओमजी, रविन्द्र कुमार आदि ने बताया कि हर वर्ष समिति द्वारा स्वयंसेवकों की मदद से तालाब और रास्ते की मरम्मत की जाती है। छठ के दौरान इस मार्ग पर मिट्टी डालकर गड्ढों को भरा जाता है और पुलिया पर बांस की रेलिंग लगाकर व्रतियों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।

उन्होंने कहा कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की है।










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