बक्सर । आर्या एकेडमी, बक्सर में संस्कृत वाङ्मय के प्रथम महाकवि तथा रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की जयंती श्रद्धा और उत्साहपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्राचार्या नीलम भारवि ने की, जबकि संचालन स्वस्ति सौम्या ने किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके बाद शिक्षिकाओं श्वेता, कोमल एवं अंशु ने महाकवि वाल्मीकि के कुछ चयनित श्लोकों का सस्वर पाठ कर वातावरण को भक्ति और ज्ञान से ओतप्रोत कर दिया।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्या नीलम भारवि ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन और उनकी रामायण आज भी समाज को अधर्म का त्याग कर सत्य, धर्म और ज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि महर्षि द्वारा रचित चौबीस हजार श्लोकों वाली रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का आदर्श है जो त्याग, प्रेम, और कर्तव्य जैसे मूल्यों को आत्मसात करने का संदेश देती है।
कार्यक्रम में तन्नु सिंहा, अदिति कुमारी और श्वेता जायसवाल ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक सूर्य, चंद्रमा और सनातन संस्कृति का अस्तित्व रहेगा, तब तक महर्षि वाल्मीकि का नाम और यश अमर रहेगा। कार्यक्रम के अंत में सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
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