बक्सर । नगर के रामेश्वरनाथ मंदिर में श्री सिद्धाश्रम विकास समिति के तत्वावधान में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। कथा व्यास के रूप में मामाजी के कृपापात्र आचार्य श्री रणधीर ओझा उपस्थित रहे।
कथा के प्रथम दिन नाथ बाबा मंदिर के महंथ पुज्य श्री शीलनाथ जी महाराज, आचार्य रणधीर ओझा और भक्तों ने रामेश्वर भगवान की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद महंथ शीलनाथ जी महाराज ने व्यासपीठ पूजन संपन्न कराया।
आचार्य श्री रणधीर ओझा ने भागवत महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत शास्त्र साक्षात नारायण कृष्ण का स्वरूप है। इसका आश्रय लेने वाला भगवान की प्रेमलक्षणा भक्ति प्राप्त कर लेता है। उन्होंने कहा कि भगवान के 24 अवतारों में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचंद्र और लीला पुरुषोत्तम श्रीकृष्णचंद्र का अवतार विशेष रूप से आदरणीय और सनातन संस्कृति के प्राण हैं।
उन्होंने बताया कि भगवान वेदव्यास ने 18 पुराण और 18 उपपुराण की रचना की, परंतु उन्हें पूर्ण आत्मिक शांति श्रीमद्भागवत के प्रणयन के बाद ही प्राप्त हुई। इस ग्रंथ की विशेषता यह है कि इसमें श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का ऐसा विस्तृत और भावपूर्ण वर्णन है, जो अन्यत्र दुर्लभ है। यही वह शास्त्र है जिसने परीक्षित महाराज को केवल सात दिनों में भक्ति मार्ग पर स्थापित कर मोक्ष प्रदान किया।
आचार्य श्री ने कहा कि सात्विक भाव और आस्तिक हृदय से श्रीमद्भागवत का अध्ययन या कथा श्रवण कर उसके मार्ग का अनुसरण करने से भगवान की प्राप्ति और सांसारिक वासनाओं से विरक्ति निश्चित होती है। इसकी शिक्षाएं हर युग में प्रासंगिक और उपादेय हैं।
इस अवसर पर सत्यदेव प्रसाद, रामस्वरूप अग्रवाल, पीयूष पांडेय, पंकज उपाध्याय सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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