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तीन दशक से समाज के सच्चे सारथी बने हुए हैं शिक्षक संदीप सिंह; शिक्षा, पर्यावरण व सामाजिक बदलाव में निभाते आ रहे महती भूमिका



बक्सर । समाज में शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जागरूकता की अलख जगाने वाले शिक्षक संदीप सिंह का जीवन अनुकरणीय मिसाल है। 1992 से बच्चों को शिक्षित करने की शुरुआत करने वाले संदीप सिंह को वर्ष 2003 में मध्य विद्यालय दुल्लहपुर में शिक्षक के रूप मैं नियुक्ति मिली। इससे पहले, वर्ष 2000 से उन्होंने पौधरोपण अभियान शुरू कर पर्यावरण संरक्षण की मुहिम को गति दी और छात्रों को भी इससे जोड़ा। गरीब बच्चों को न सिर्फ निशुल्क शिक्षा, बल्कि भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराकर उन्होंने कई बच्चों को उच्च शिक्षा की राह पर अग्रसर किया।


उनके मार्गदर्शन में कई छात्र आईआईटी, एनआईटी तक पहुँचे, वहीं कुछ ने यूपीएससी और बीपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। संदीप सिंह ने लगभग 5 एकड़ बंजर भूमि पर अपने शिष्यों के साथ मिलकर एक विशाल बगीचा तैयार किया, जहाँ गुरुकुल पद्धति से ग्रामीण बच्चों को ज्ञान-विज्ञान, धर्म, अध्यात्म और योग की शिक्षा दी जाती है।



सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उन्होंने खुद गीत लिखे और अपनी आवाज में गाकर सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश फैलाया। उनके कई गीतों पर मिलियन व्यूज मिले। इसके अलावा, वे छात्र-छात्राओं को निःशुल्क जुडो और कराटे का प्रशिक्षण देकर आत्मरक्षा के लिए तैयार करते हैं। 90 के दशक में दहेज प्रथा के खिलाफ अभियान चलाकर उन्होंने स्वयं दहेजमुक्त विवाह किया, जिसके कारण उन्हें परिवार और समाज के विरोध का भी सामना करना पड़ा। संदीप सिंह आज भी शिक्षा, पर्यावरण और सामाजिक बदलाव की राह पर अडिग हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने हुए हैं।

जनहित के कार्यों के लिए 8789890757 इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।






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