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टीबी का रोगाणु है घातक, बीमारी को जड़ से खत्म करने के लिए दवा की पूरी खुराक खाएं- people-body




- टीबी मरीजों का सही समय पर इलाज कर बचाई जा सकती है उनकी जान
- उचित देखरेख में रोगी को अल्पावधि वाली क्षय निरोधक औषधियों के सेवन कराने वाली विधि है डॉट्स

(बक्सर ऑनलाइन न्यूज़/आरा):- यूं तो बीमारियां लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता के आधार पर शरीर पर असर दिखाती है। लेकिन, ज्यादातर बीमारियां अनदेखी के कारण भयानक रूप ले लेती हैं। इन्हीं बीमारियों में से एक है ट्यूबरक्लोसिस (टीबी)। जो  हवा में तैरते ड्रॉपलेट्स के माध्यम से एक मरीज से दूसरे मरीज में संक्रमित होता है। यह जीवाणु से फैलता है, मुख्य रूप से माइक्रोबैकटीरियम ट्यूबरक्लोसिस से। यह आम तौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है, किंतु यह केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र, लिम्फतंत्र, संचार तंत्र, मूत्रजनन तंत्र, हड्डियां, जोड़ यहां तक की त्वचा को भी प्रभावित करता है। यदि इसका इलाज नहीं मिले तो आधे से अधिक रोगी काल का ग्रास बन जाते हैं। डब्लूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व की एक तिहाई आदमी के शरीर में इस रोग का संक्रमण पाया जाता है। प्रति एक सेकंड में 1 नया संक्रमण भी होता है। किंतु प्रत्येक संक्रमित व्यक्ति इस इस रोग से ग्रसित नहीं होता है। इसके छिपे संक्रमण से ग्रस्त 10 में से 1 को रोग शुरू हो जाता है।
हवा से फैलता है टीबी का रोगाणु :
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. सुरेश चंद्र सिन्हा ने बताया, टीबी के रोगाणु वायु द्वारा फैलते हैं। जब फेफड़े का यक्ष्मा रोगी खांसता या छींकता है तो लाखों-करोड़ों की संख्या में टीबी के रोगाणु थूक के छोटे कणों (ड्राप्लेट्स) के रूप में वातावरण में फेंकता है। बलगम के छोटे-छोटे कण जब सांस के साथ स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाता और वह व्यक्ति टीबी रोग से ग्रसित हो जाता है। चिकित्सा कर्मी की देखरेख में रोगी को अल्पावधि वाली क्षय निरोधक औषधियों के सेवन कराने वाली विधि को डॉट्स (डायरेक्टली ऑब्जर्वड ट्रिटमेंट शॉर्ट कोर्स) कहते हैं। इसके तहत किया गया इलाज काफी प्रभावी हो जाता है। पूरा कोर्स कर लेने पर यक्ष्मा बीमारी से मरीजों को मुक्ति भी मिल जाती है।
निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराने में आसानी : 
टीबी रोगियों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार द्वारा प्रति माह 500 रुपये की धनराशि दी जा रही है। निजी चिकित्सक एवं फार्मासिस्ट द्वारा उपलब्ध करायी गयी जानकारी से सभी रोगियों को पोषण राशि प्रदान करने में आसानी होगी। जिला टीबी विभाग निरंतर टीबी मरीजों को चिन्हित करने का प्रयास कर रही है। इसके लिए सक्रिय टीबी मरीज खोजी अभियान भी चलाए जाते है। सही समय पर टीबी मरीजों की पहचान करने से उनका सम्पूर्ण इलाज संभव है। इसके लिए सरकार द्वारा टीबी रोगियों के लिए निशुल्क टीबी की दवा (डॉट्स) की उपलब्धता जिले के साथ अन्य प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य केन्द्रों में भी करायी गयी है। 
अधिनियम उल्लंघन करने पर सजा का प्रावधान :
टीबी निरोधी क्लिनिकल संस्था, फार्मेसी, केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं द्वारा टीबी रोगी के संबंध में सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की दशा में दंड संहिता (1860 का 45) के धारा 269 के तहत दोषी व्यक्ति को छह महीने तक की सजा एवं जुर्माना हो सकता है। जबकि दंड संहिता (1860 का 45) के धारा 270 के तहत दोषी व्यक्ति को दो वर्ष तक की सजा एवं जुर्माना हो सकता है।
टीबी के लक्षण :
- दो सप्ताह या अधिक समय से लगातार खांसी का होना
- खांसी के साथ बलगम का आना
- सांय के समय शरीर का तापमान बढ़ जाना
- वजन में कमी हो
- भूख कम लगना
- सीने में दर्द
- रक्त रंजित बलगम आना







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