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प्रदूषण की जगह दीयों के साथ मनाए रौशनी का त्यौहार, धुएं वाले पटाखों से रहें दूर- diwali-festival





• पटाखों के जहरीले धुएं से बढ़ जाती है सांस की बीमारियों की संभावना
• तेज आवाज के पटाखें बुजुर्गों व शिशुओं के लिए नुकसान दायक

(बक्सर ऑनलाइन न्यूज़):- जिले के सभी प्रखण्डों में रौशनी का महापर्व दीपावली गुरुवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। लोग दीप और पटाखें जलाकर अपनी खुशियों का इजहार करने के साथ अपने सगे संबंधियों को मिठाई व उपहार देकर खुशियां भी बांटते हैं। लेकिन, इन सब रीतियों के बीच अधिकांश लोग बड़ी गलती भी करते हैं। लोग तेज आवाज और धुओं वाले पटाखे जलाकर प्रकृति के साथ साथ अपनी सेहत को भी खतरे में डालते हैं। पटाखों के धुएं से प्रदूषण फैलता है। जो स्वास्थ्य के नुकसान दायक होता है। लॉक डाउन के पहले चरण के बाद से पर्यावरण में काफी सुधार हुआ था। जो धीरे धीरे फिर से प्रदूषित होने लगा है और अपने साथ बीमारियों की संभावना भी बढ़ा रहा है। लोगों को समझना होगा कि प्रदूषण जितना कम फैलेगा, सेहत के दृष्टिकोण से हम सभी लोग उतने सुरक्षित रहेंगे। इसलिए दीपावली के अवसर पर सभी को संकल्प लेना चाहिए कि हम पटाखों के जहरीले धुएं से प्रदूषण न फैलने दें।
शिशुओं के पास तेज आवाज के पटाखें न जलाएं : 
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया, वैसे तो पटाखें सभी के लिए नुकसानदायक है। लेकिन, शिशुओं, गर्भवती महिलाओं व बुजुर्गों को ज्यादा हानि पहुंचाता है। पटाखों से निकलने वाला धुंआ वायु प्रदूषण व्यक्ति के श्वसन तंत्रिका को प्रभावित करता है। जो सांस संबंधी व्याधियों से ग्रसित लोगों के लिए काफी खतरनाक है। कोविड- 19 के वायरस जो हमारे श्वसन तंत्रिका को ही प्रभावित करती है, उसके लिए भी आवश्यक है कि कम से कम पटाखे चलाये जायें। किसी भी तरह से श्वसन तंत्रिका का संक्रमित या कमजोर हो जाना हमारे लिए घातक हो सकता है। वहीं, इनके तेज आवाज से जहां शिशुओं के कान के पर्दे फटने, त्वचा और आंखों को नुकसान की संभावना काफी प्रबल रहती है। इसलिए शिशुओं और बच्चों के समीप तेज आवाज वाले पटाखें न जलाएं। साथ ही, गर्भवती महिलाओं के गर्भस्थ में बच्चे को भी नुकसान होता है। इससे शिशु के जन्म के बाद भी उसमें कई विकृतियां हो सकती हैं। इसलिए शिशुओं और गर्भवती माताओं को भी बाहर न निकलने दें।   
पटाखों में होते हैं जहरीले तत्व : 
सिविल सर्जन डॉ. जितेंद्र नाथ ने बताया, युवाओं को आकर्षित करने के लिए कंपनियां तेज आवाज के पटाखों का निर्माण करती हैं। इन पटाखों में सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड, कॉपर,लेड, मैग्नेशियम, सोडियम, जिक, नाइट्रेट एवं नाइट्राइट जैसे घातक तत्व मौजूद रहते है। पटाखों की तेज आवाज से मानसिक तनाव, हृदयाघात, कान के पर्दे फटने का या तेज रौशनी से आंखों को नुकसान होने का डर रहता है। यही नहीं पटाखों से निकलने वाले घातक तत्वों से त्वचा को भी नुकसान पहुंचता है। बुजुर्गों को इस दौरान घर के बाहर नहीं निकलने दें। दमा के मरीजों को हमेशा इन्हेलर साथ रखने और जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल की हिदायत दें। यदि उनमें किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक असुविधा या बदलाव दिखे तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। साथ ही, पटाखों के धुएं से वायु प्रदूषण व कोरोना संक्रमण को बढ़ावा भी मिल सकता है। इसलिए इस बार कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुये रोशनी के जरिये त्यौहार में खुशिया बांटें प्रदूषण नहीं।


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