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कालाजार उन्मूलन के द्वितीय चक्र के लिए सिंथेटिक पायराथाइड का होगा छिड़काव- kalajar bukhar


 



(बक्सर ऑनलाइन न्यूज़):- जिले में कालाजार उन्मूलन को लेकर सिंथेटिक पायराथाइड का छिड़काव 15 जुलाई से अगले 66 दिनों तक चिह्नित 5 गाँव में  छिड़काव के लिए आदेश दिया गया है। छिड़काव के लिए 2 टीम का गठन किया गया है. प्रत्येक टीम में 6 लोगों को रखा गया है जिन्हें प्रशिक्षित किया गया है। एक भी घर नहीं छूटे इसका ख्याल रखने को प्रशिक्षण में कर्मियों को कहा गया है। छिड़काव में आशा, फैसिलिटेटर व प्रखंड स्तर के कर्मियों व अधिकारियों को शामिल किया गया है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया कालाजार की वाहक बालू मक्खी को खत्म करने तथा कालाजार के प्रसार को कम करने के लिए इंडोर रेसीडूअल स्प्रे (आईआरएस) किया जाता है। यह छिड़काव घर के अंदर दीवारों पर छह फीट की ऊंचाई तक होता है। उन्होंने  कहा कि लोगों को प्रत्येक घरों में अवश्य छिड़काव करानी चाहिए, चाहे वह पूजा घर हो, बाथरूम हो या मवेशियों का स्थान। सभी जगहों पर छिड़काव कराने से कालाजार संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। छिड़काव के दो घन्टे के बाद घर मे प्रवेश करना  चाहिये। साथ ही छिड़काव के छह महीने तक घर मे पेंटिग नहीं करानी चाहिए। इसे लेकर लोगों को जागरूक करने की ज़रूरत है।
सभी प्रखंड में किया जाएगा छिड़काव:
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी ने बताया जिले के सभी 11 प्रखंडों के 5 गाँवों में 5,524 घरों, 17,576 कमरों में, 32,904 प्रभावित लोगों के बीच छिड़काव कराने की योजना है|
हर पीएचसी पर मुफ्त जांच सुविधा उपलब्ध :
डॉ. कुमार ने बताया हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर कालाजार जांच की सुविधा उपलब्ध है।  कालाजार की किट (आरके-39) से 10 से 15 मिनट के अंदर टेस्ट हो जाता है। हर सेंटर पर कालाजार के इलाज में विशेष रूप से प्रशिक्षित एमबीबीएस डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी उपलब्ध हैं। 
कालाजार के कारण :
डॉ. शैलेन्द्र कुमार ने बताया कालाजार मादा फाइबोटोमस अर्जेंटिपस(बालू मक्खी)  के काटने के कारण होता है, जो कि लीशमैनिया परजीवी का वेक्टर (या ट्रांसमीटर) है। किसी जानवर या मनुष्य को काट कर हटने के बाद भी अगर वह उस जानवर या मानव के खून से युक्त है तो अगला व्यक्ति जिसे वह काटेगा वह संक्रमित हो जायेगा। इस प्रारंभिक संक्रमण के बाद के महीनों में यह बीमारी और अधिक गंभीर रूप ले सकती है, जिसे आंत में लिशमानियासिस या कालाजार कहा जाता है।
सरकार द्वारा रोगी को मिलती है आर्थिक सहायता :
कालाजार से पीड़ित रोगी को मुख्यमंत्री कालाजार राहत योजना के तहत श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में पैसे भी दिए जाते हैं। बीमार व्यक्ति को 6600 रुपये राज्य सरकार की ओर से और 500 रुपए केंद्र सरकार की ओर से दिए जाते हैं। यह राशि वीएल (ब्लड रिलेटेड) कालाजार में रोगी को प्रदान की जाती है। वहीं चमड़ी से जुड़े कालाजार (पीकेडीएल) में 4000 रुपये  की राशि केंद्र सरकार की ओर से दी जाती है।


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