बक्सर । नगर के रामेश्वरनाथ मंदिर में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस कथा व्यासपीठ से मामाजी के कृपापात्र आचार्य श्री रंधीर ओझा जी ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न दिव्य बाल लीलाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति में सराबोर नजर आए। आचार्य ने श्रद्धालुओं को भक्ति, सदाचार और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
प्रवचन के दौरान आचार्य श्री रंधीर ओझा ने कहा कि भगवान के अवतार और उनकी लीलाएं केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि इनमें मानव जीवन के लिए गहन प्रेरणा और मार्गदर्शन निहित है। भगवान श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, करुणा, धर्म और लोककल्याण का संदेश देता है।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्तर प्रसंगों के साथ पूतना वध और शकटासुर वध सहित विभिन्न बाल लीलाओं का वर्णन किया गया। पूतना प्रसंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान की करुणा असीम है और उनके संपर्क मात्र से जीव का कल्याण संभव है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा का प्रत्येक प्रसंग मानव जीवन को सकारात्मक दृष्टि, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना से जोड़ता है।
आचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य भौतिक उपलब्धियों की दौड़ में व्यस्त है, लेकिन वास्तविक शांति और संतोष के लिए आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाना आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सत्य, सेवा, प्रेम और सदाचार के मार्ग पर चलने तथा भगवान के प्रति अटूट विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल मनोरंजन के प्रसंग नहीं हैं, बल्कि इनमें वात्सल्य, प्रेम, करुणा और भक्ति का व्यापक संदेश निहित है। ब्रजवासियों और भगवान श्रीकृष्ण के बीच का निष्कपट प्रेम एवं पूर्ण समर्पण भक्त और भगवान के संबंध का उत्कृष्ट उदाहरण है।
कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा स्थल पर गूंजते श्रीकृष्ण के जयघोष और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
पंचम दिवस की कथा के समापन पर भगवान की विधिवत आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया।
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