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फरक्का जल संधि के पुनर्विचार को बक्सर से जदयू का ‘नीतीश संवाद’ शुरू, संजय झा बोले- 30 साल पहले बिहार के हितों की हुई अनदेखी



- ‘सत्ता सुख के लिए बिहार के हित बेच दिए’, फरक्का संधि पर जदयू का विपक्ष पर सीधा हमला

- बिहार और केंद्र में अपनी सरकार होने पर उठे सवाल तो पुराने शासन पर साधा निशाना, पूछा- ऐसी संधि क्यों की थी?

बक्सर । फरक्का जल संधि की शर्तों पर पुनर्विचार और बिहार के हितों को प्राथमिकता देने की मांग को लेकर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने शनिवार को बक्सर से ‘नीतीश संवाद’ कार्यक्रम की शुरुआत की। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा इस अभियान का शुभारंभ करने बक्सर पहुंचे। उनके साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा भी मौजूद रहे।

संजय झा के बक्सर आगमन को लेकर जदयू कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। ब्रह्मपुर, ढकाइच, चुरामनपुर, अहिरौली मोड़ और गोलंबर समेत विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ उनका जोरदार स्वागत किया।

बक्सर पहुंचने के बाद संजय झा ने सबसे पहले रामरेखा घाट स्थित रामेश्वरनाथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और मत्था टेका। इसके बाद वे सोमेश्वर स्थान त्रिमुहानी पहुंचे, जहां गंगा तट और नदी की स्थिति का निरीक्षण किया। इसके पश्चात वे बगीचा उत्सव लॉन स्थित कार्यक्रम स्थल पहुंचे।





कार्यक्रम स्थल पर डुमरांव विधायक राहुल सिंह, राजपुर विधायक संतोष निराला, प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा, जदयू जिलाध्यक्ष राजकुमार शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संजय झा एवं उमेश कुशवाहा का गर्मजोशी से स्वागत किया। यहां आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जदयू कार्यकर्ता शामिल हुए।

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि 12 दिसंबर 2026 को भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि के 30 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 30 वर्ष पहले हुए समझौते में बिहार के हितों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं मिली थी और इस बार ऐसी स्थिति दोहराई नहीं जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि फरक्का बैराज के कारण गंगा में गाद जमा होने की समस्या गंभीर होती जा रही है। इसका असर बिहार के लोगों, किसानों और सिंचाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार को एक ओर गर्मी के दिनों में पानी की कमी और सूखे जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, वहीं मानसून के दौरान बाढ़ बड़ी चुनौती बन जाती है।




संजय झा ने कहा कि पूर्व की जल संधि में गंगा के जल प्रवाह के आधार पर पानी के बंटवारे की व्यवस्था तय की गई थी। कम जल प्रवाह की स्थिति में भी बांग्लादेश को निश्चित मात्रा में पानी देने का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि गंगा की बदलती स्थिति और बिहार की वर्तमान जरूरतों को देखते हुए अब संधि की शर्तों पर बिहार के हितों के अनुरूप गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि 1975 में फरक्का बैराज के निर्माण के बाद गंगा में भारी मात्रा में गाद जमा होने की समस्या बढ़ी, जिसका असर नदी के प्रवाह और बिहार के कई जिलों पर पड़ा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि बिहार के जल अधिकार, कृषि, सिंचाई और बाढ़ की समस्या से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने संधि की जल बंटवारे की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि 70 हजार क्यूसेक या उससे कम पानी होने पर बांग्लादेश को 35 हजार क्यूसेक पानी देने का प्रावधान था। 70 से 75 हजार क्यूसेक के बीच निर्धारित हिस्सेदारी और 75 हजार क्यूसेक से अधिक पानी होने पर भारत का हिस्सा रखने के बाद शेष पानी देने की व्यवस्था बताई गई थी।

12 जिलों में चलेगा जनसंवाद

संजय झा ने कहा कि गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिलों में जनता से संवाद किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य लोगों को फरक्का जल संधि के प्रभावों से अवगत कराना और बिहार के जल अधिकार, सिंचाई, कृषि तथा बाढ़ की समस्या को लेकर जनमत तैयार करना है।









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