ब्रह्मपुर । तुलसी आश्रम, रघुनाथपुर स्थित महाकालेश्वर मंदिर परिसर में आयोजित रामलीला के पांचवें दिन अहिल्या उद्धार और जनक की पुष्पवाटिका में राम-सीता मिलन का भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों की सजीव प्रस्तुति ने दर्शकों को भक्ति और भावनाओं से सराबोर कर दिया।
मंचन में दिखाया गया कि गुरु विश्वामित्र के मार्गदर्शन में प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण बक्सर से जनकपुर धाम की ओर प्रस्थान करते हैं। रास्ते में उन्हें गौतम ऋषि के श्राप से पत्थर बनी अहिल्या मिलती हैं। प्रभु श्रीराम के चरण-स्पर्श से अहिल्या का उद्धार होता है और वह पुनः अपने मानवीय स्वरूप में लौट आती हैं। इस प्रसंग ने दर्शकों को प्रभु की कृपा और भक्ति का संदेश दिया।
इसके बाद श्रीराम और लक्ष्मण जनकपुर पहुंचते हैं और नगर भ्रमण करते हुए राजा जनक की पुष्पवाटिका में जाते हैं। यहीं पहली बार माता सीता की नजर प्रभु श्रीराम पर पड़ती है। राम-सीता के प्रथम मिलन का दृश्य बेहद मनोहारी रहा। गिरिजा माता की पूजा के दौरान माता सीता द्वारा श्रीराम को अपने वर के रूप में पाने की कामना का भावपूर्ण मंचन दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित कर गया।
तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश ओझा ने बताया कि रामलीला के अगले दिन राजा जनक की सभा में प्रभु श्रीराम द्वारा शिवधनुष भंग का भव्य और मनोहारी मंचन किया जाएगा।
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