बक्सर । बक्सर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पहचान को लेकर शहर का नाम बदलकर ‘सिद्धाश्रम’ किए जाने की मुहिम को तेज करने की तैयारी है। भाजपा नेत्री वर्षा पाण्डेय के नेतृत्व में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को बसांव मठिया, बक्सर में जन-संवाद एवं पत्रकार वार्ता का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन सुबह 11 बजे से होगा।
“अब बक्सर नहीं, सिद्धाश्रम कहिए” पहल के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में धर्म एवं अध्यात्म के क्षेत्र से जुड़े विद्वान, इतिहासकार, साहित्यकार, शिक्षाविद् और प्रबुद्ध नागरिक शामिल होंगे। इस दौरान बक्सर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
आयोजक वर्षा पाण्डेय ने कहा कि बक्सर की पहचान केवल वर्तमान नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध प्राचीन इतिहास, संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत से भी है। उन्होंने कहा कि बक्सर को महर्षि विश्वामित्र की तपोभूमि और प्रभु श्रीराम की ज्ञानभूमि सिद्धाश्रम से जोड़ा जाता है। ऐसे में इस ऐतिहासिक पहचान को लेकर समाज के बीच व्यापक संवाद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ‘सिद्धाश्रम’ महज नाम नहीं, बल्कि बक्सर की प्राचीन गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी पहचान है। जन-संवाद के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और समाज के प्रबुद्ध लोगों के विचार एवं सुझाव लिए जाएंगे।
कार्यक्रम में बक्सर की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान, सिद्धाश्रम से जुड़े धार्मिक एवं ऐतिहासिक संदर्भ, नाम परिवर्तन की संभावनाओं तथा इसके लिए आगे की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। आयोजकों के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुरू की जा रही यह पहल बक्सर की प्राचीन पहचान को लेकर जन-जागरूकता और संवाद को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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