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सिद्धाश्रम विकास परिषद की दूसरी बैठक में सामाजिक दायित्वों पर मंथन



बक्सर । नवगठित सिद्धाश्रम विकास परिषद की दूसरी बैठक रविवार को बसाव मठिया प्रांगण में राकेश दुबे की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक का शुभारंभ शांति मंत्र के साथ हुआ। इस दौरान परिषद के उद्देश्य, स्वरूप, विस्तार और आगामी कार्ययोजना को लेकर सदस्यों ने विस्तार से विचार-विमर्श किया।

बैठक में सदस्यों ने कहा कि किसी भी सामाजिक संगठन की पहचान उसके नाम या सदस्य संख्या से नहीं, बल्कि समाजहित में किए गए कार्यों से बनती है। परिषद का प्रयास रहेगा कि जनविश्वास को आधार बनाकर ऐसे कार्य किए जाएं, जिनमें समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।





सदस्यों ने सामाजिक संवाद और सामूहिक प्रयास को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि संगठन की गतिविधियां केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जागरूकता, सहयोग और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाले कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

बैठक में बक्सर की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नई पीढ़ी को स्थानीय संस्कृति, परंपरा तथा सामाजिक दायित्वों से जोड़ने पर भी चर्चा हुई। जनहित से जुड़े कार्यों को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।





परिषद के सदस्यों ने कहा कि संगठन की मजबूती के लिए विश्वास, पारदर्शिता, अनुशासन और निरंतर सेवा-कार्य जरूरी हैं। परिषद की कार्यशैली में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया गया।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय कथावाचक प्रेमाचार्य पितांबर जी महाराज, संजय ओझा, अधिवक्ता राघव कुमार पाण्डेय, अग्नि कुमार पाण्डेय, गणेश पाण्डेय, आशुतोष चतुर्वेदी, पंकज उपाध्याय, इंद्रजीत चौबे, संजय शास्त्री जी सहित अन्य सदस्य एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में सभी ने सिद्धाश्रम विकास परिषद को ऐसे सामाजिक मंच के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया, जहां पद से अधिक दायित्व और संगठन से अधिक समाज को महत्व दिया जाए। परिषद के सदस्यों ने कहा कि आने वाले दिनों में संगठन की पहचान घोषणाओं से नहीं, बल्कि समाज के बीच दिखाई देने वाले सकारात्मक परिणामों से होगी।








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