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महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय में इतिहास, साहित्य और संस्कृति का त्रिवेणी संगम, संगोष्ठी, प्रेमचंद दिवस व राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन



बक्सर । महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय, बक्सर में शनिवार को शिक्षा, साहित्य और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह की अध्यक्षता एवं संरक्षण में आयोजित महा-समारोह में स्नातकोत्तर इतिहास विभाग की विभागीय संगोष्ठी, मुंशी प्रेमचंद जयंती पर 'प्रेमचंद दिवस' तथा 'माँ निर्मला देवी फाउंडेशन' के तत्वावधान में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। पूरे दिन चले इस त्रिस्तरीय कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों, साहित्यकारों और अतिथियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में स्नातकोत्तर इतिहास विभाग की ओर से गांधीवादी दर्शन पर एक दिवसीय विभागीय संगोष्ठी आयोजित की गई। 'सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह' विषयक इस संगोष्ठी में लगभग तीन दर्जन छात्र-छात्राओं ने अपने शोधपरक एवं वैचारिक पत्र प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने गांधीवादी सिद्धांतों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र कुमार, प्रधानाचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह तथा मुख्य वक्ता डॉ. मृत्युंजय सिंह मौजूद रहे।




अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो. कृष्णकांत सिंह ने विद्यार्थियों के गंभीर अध्ययन और वैचारिक प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में चिंतनशील दृष्टि विकसित करने का माध्यम बनते हैं। मुख्य वक्ता डॉ. मृत्युंजय सिंह ने 'वैश्विक साहित्य एवं इतिहास के स्वरूप और प्रभाव' विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए जटिल प्रश्नों का ऐतिहासिक तथ्यों और तार्किक विश्लेषण के साथ उत्तर देकर उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। प्रथम सत्र का संचालन इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन कुमार पाठक ने किया।

द्वितीय चरण में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती 'प्रेमचंद दिवस' के रूप में मनाई गई। वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्यिक अवदान, सामाजिक सरोकारों तथा शोषित-वंचित वर्ग के प्रति उनकी संवेदनशीलता पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि प्रो. मृत्युंजय सिंह तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने प्रेमचंद के साहित्य के विविध आयामों पर सारगर्भित व्याख्यान देते हुए कहा कि प्रेमचंद के पात्र आज भी समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करते हैं और उनका साहित्य मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देता है।

कार्यक्रम के तृतीय चरण में 'माँ निर्मला देवी फाउंडेशन' के सौजन्य से राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। 'हृदय के मंच' पर देशभक्ति, प्रेम, समाज, भाषा और समसामयिक विषयों पर आधारित कविताओं की प्रस्तुति ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा। कवि प्रीतम ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं से उत्साह का संचार किया, जबकि चिन्मय प्रकाश झा ने प्रेम और संवेदनाओं से जुड़ी कविताओं का पाठ किया। कवि वशिष्ठ पांडेय ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की, वहीं नर्मदेश्वर उपाध्याय ने देशभक्ति और भावपूर्ण गीतों से श्रोताओं को भावुक कर दिया।




कवि भगवान पांडेय ने अपने संस्मरणों और गीतों से पुरानी स्मृतियों को ताजा किया। संजय सागर ने व्यंग्य के माध्यम से समकालीन व्यवस्था पर कटाक्ष किया, जबकि कवि आजमी की भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभागार को भावविभोर कर दिया। कवि सम्मेलन का संचालन डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने किया। अंत में डॉ. श्वेत प्रकाश ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

समारोह के समापन पर 'माँ निर्मला देवी फाउंडेशन' के सचिव एवं सहायक प्राध्यापक डॉ. रासबिहारी शर्मा की ओर से सभी अतिथियों, कवियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं के लिए बिहार के पारंपरिक व्यंजन लिट्टी-चोखा और खीर का सामूहिक प्रीतिभोज आयोजित किया गया। आत्मीय वातावरण में आयोजित इस प्रीतिभोज के साथ दिनभर चला यह ऐतिहासिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।







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