बक्सर । डुमरांव नगर क्षेत्र में 131 फीट ऊंचे मोबाइल टॉवर की कथित चोरी का मामला दूसरे दिन भी रहस्य और चर्चाओं के केंद्र में बना रहा। लाखों रुपये मूल्य के मोबाइल टॉवर, 15 केवीए डीजल जनरेटर तथा अन्य तकनीकी उपकरणों के गायब होने की शिकायत मिलने के बावजूद गुरुवार शाम तक पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नहीं की। पुलिस पूरे मामले को संदेहास्पद मानते हुए विभिन्न पहलुओं की जांच में जुटी हुई है।
जीटीएल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के भूमि एवं संचालन पदाधिकारी बैद्यनाथ ओझा ने डुमरांव थाना में आवेदन देकर आरोप लगाया था कि वार्ड संख्या-18 स्थित कंपनी का मोबाइल टॉवर, जनरेटर और अन्य उपकरण अज्ञात लोगों द्वारा गायब कर दिए गए हैं। शिकायत सामने आने के बाद यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। लोगों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि आखिर 131 फीट ऊंचा टॉवर कैसे गायब हो गया और इतने बड़े काम की भनक किसी को क्यों नहीं लगी।
मामले में नया मोड़ तब आया जब पुलिस ने जांच शुरू की। प्रभारी थानाध्यक्ष अर्चना कुमारी ने बताया कि आवेदन मिलने के बाद कंपनी के प्रतिनिधि और जिस जमीन पर टॉवर स्थापित था, उस भू-स्वामी को पूछताछ के लिए थाना बुलाया गया था। हालांकि गुरुवार को दोनों पक्ष थाना नहीं पहुंचे, जिससे जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
थानाध्यक्ष ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला जितना सरल दिखाई देता है, उतना है नहीं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि टॉवर वास्तव में चोरी हुआ है या फिर किसी अन्य प्रक्रिया के तहत हटाया गया था। सभी तथ्यों की जांच के बाद ही प्राथमिकी दर्ज करने और आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।
इधर, जमीन मालिक हरेनाथ यादव के बयान ने भी मामले को और उलझा दिया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में उनकी जमीन पर मोबाइल टॉवर लगाया गया था। इसका एग्रीमेंट वर्ष 2022 तक था, लेकिन वर्ष 2017 के बाद कंपनी ने किराया देना बंद कर दिया। कई बार कंपनी कार्यालय जाकर संपर्क करने और कानूनी नोटिस भेजने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने बताया कि किराया बंद होने के बाद उन्होंने उस जमीन की ओर जाना भी छोड़ दिया था।
हरेनाथ यादव के अनुसार, टॉवर बंद होने के बाद समय-समय पर वहां से छोटे-मोटे सामान चोरी होने की सूचनाएं मिलती थीं, जिसकी जानकारी उन्होंने कंपनी को भी दी थी। बावजूद इसके कंपनी की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि टॉवर गायब होने की जानकारी उन्हें भी थाने से ही मिली है।
चार-पांच दिनों तक परिसर में रुके थे संदिग्ध
स्थानीय लोगों के अनुसार, टॉवर हटाने वाले लोग करीब 15 से 20 दिन पहले वहां पहुंचे थे और चार से पांच दिनों तक उसी परिसर में ठहरे हुए थे। इस दौरान वे वहीं खाना बनाकर खाते भी थे। चूंकि वे व्यवस्थित ढंग से काम कर रहे थे, इसलिए आसपास के लोगों और भू-स्वामी को लगा कि वे कंपनी के अधिकृत कर्मचारी हैं। बाद में टॉवर गायब होने और शिकायत दर्ज होने की जानकारी मिलने पर लोग हैरान रह गए।
इस बीच डुमरांव शहर में यह मामला लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है। चाय की दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक टॉवर चोरी की चर्चा हो रही है। कोई इसे संगठित गिरोह की करतूत बता रहा है तो कोई लंबे समय से बंद पड़े टॉवर और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़ा मामला मान रहा है। फिलहाल पुलिस जांच पूरी होने का इंतजार कर रही है, जबकि 131 फीट ऊंचे टॉवर के गायब होने का रहस्य लगातार गहराता जा रहा है।
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