बक्सर । गृह निर्माण ऋण चुकाने के 14 वर्ष बाद भी जमीन के मूल दस्तावेज वापस नहीं करने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, बक्सर ने अहम फैसला सुनाया है। आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक की आशियाना नगर, पटना शाखा को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए 60 दिनों के भीतर मूल दस्तावेज लौटाने और 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
परिवादी की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि बक्सर में कार्यरत रहे रिटायर्ड सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी कृष्ण सिंह ने वर्ष 2002 में गृह निर्माण के लिए भारतीय स्टेट बैंक की आशियाना नगर शाखा से तीन लाख रुपये का ऋण लिया था। ऋण स्वीकृति के समय उन्होंने अपनी जमीन के मूल दस्तावेज, रसीद एवं अन्य आवश्यक कागजात बैंक में गिरवी रखे थे। वर्ष 2010 तक उन्होंने बैंक के नियमों के अनुसार संपूर्ण ऋण राशि चुका दी थी।
ऋण अदायगी के बाद से ही वे लगातार अपने मूल कागजात की मांग करते रहे। इस संबंध में बैंक के वरीय अधिकारियों को कई बार पत्र भी भेजे गए, लेकिन दस्तावेज वापस नहीं किए गए। अंततः परेशान होकर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग, बक्सर में वाद दायर किया।
आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि बैंक द्वारा सेवा में स्पष्ट कमी बरती गई है। अपने आदेश में आयोग ने बैंक को निर्देश दिया कि 60 दिनों के भीतर मूल दस्तावेज लौटाए जाएं तथा परिवादी को 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति और 10 हजार रुपये वाद खर्च के रूप में भुगतान किया जाए।
आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो देय राशि पर 8 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा। आयोग के इस फैसले से उपभोक्ताओं में न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा और मजबूत हुआ है।
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