बक्सर । डुमरांव प्रखंड के नया भोजपुर गांव स्थित ऐतिहासिक राजा भोज के नवरत्न गढ़ किले को अब तक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना को स्वीकृति नहीं मिल सकी है। सरकारी उपेक्षा और संरक्षण के अभाव में यह बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहर आज जमींदोज होने के कगार पर पहुंच चुकी है। कभी शौर्य, संस्कृति और गौरव का प्रतीक रहा यह किला आज खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।
वर्ष 2022 में बिहार विरासत विकास समिति की एक कमेटी ने किले का दौरा कर इसके संरक्षण और विकास का भरोसा दिलाया था, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी कोई ठोस पहल नहीं हो सकी। आज भी किला उसी उपेक्षित अवस्था में खड़ा है। दूर-दराज से आने वाले पर्यटक और इतिहास प्रेमी इसे देखने की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन बदहाल स्थिति देखकर निराश होकर लौट जाते हैं।
इतिहासकारों के अनुसार, मालवा पर दिल्ली के सुल्तानों का कब्जा होने के बाद राजा भोज के वंशज पूरब की ओर आए थे। राजा भोज के पुत्र ने डुमरांव के समीप भोजपुर नामक नगरी बसाई थी। परमार वंश के राजा रुद्र प्रताप सिंह ने वर्ष 1663 में नवरत्न गढ़ किले का निर्माण कराया था। बाद में मुगल शासकों ने इस किले पर हमला किया, जिसमें किले को भारी क्षति पहुंची और राजा रुद्र प्रताप सिंह को मृत्युदंड दिया गया। इसके बावजूद यह किला लंबे समय तक राजा भोज के गौरवशाली इतिहास का साक्षी बना रहा।
डुमरांव से लगभग तीन किलोमीटर दूर स्थित नवरत्न गढ़ किले को बिहार के प्रमुख विरासत स्थलों में गिना जाता है। वर्ष 2013 में जिला प्रशासन ने इसके संरक्षण एवं पर्यटन विकास के लिए 45 लाख रुपये का प्रस्ताव पर्यटन विभाग को भेजा था, लेकिन वह प्रस्ताव भी फाइलों में ही दबकर रह गया। बाद में 2022 में विधानसभा की बिहार विरासत समिति ने सभापति भाई बिरेंद्र की अगुआई में निरीक्षण कर संरक्षण का आश्वासन दिया था, जिससे स्थानीय लोगों की उम्मीदें जगी थीं, परंतु वह भी हकीकत में नहीं बदल सका।
इस मुद्दे को माले के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने विधानसभा में जोरदार तरीके से उठाया था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। वहीं, डुमरांव के जदयू विधायक राहुल सिंह ने कहा है कि राजा भोज के नवरत्न गढ़ किले को संरक्षित करने और इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे तथा इस विषय को विधानसभा में फिर से प्रमुखता से उठाया जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नवरत्न गढ़ किला न केवल ऐतिहासिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि समय रहते सरकार ने इसके संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह अमूल्य विरासत इतिहास के पन्नों में ही सिमट कर रह जाएगी। लोगों की मांग है कि सरकार शीघ्र निर्णय लेकर इस ऐतिहासिक धरोहर को बचाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित करे।
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