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छुआछूत से नहीं फैलता कुष्ठ, ना करें भेदभाव: डॉ. शालीग्राम- doctor shaligram






(बक्सर ऑनलाइन न्यूज़):- कुष्ठ रोग को जड़ से समाप्त करने के उद्देश्य से जिले में 31 अक्तूबर तक कुष्ठ रोगी खोजी अभियान के साथ उपचार अभियान चलाया गया। इस दौरान जिले में नए कुष्ठ रोगियों को चिन्हित करते हुए उनका उपचार भी शुरू किया गया। राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर गांधी जयंती के अवसर पर ग्रेड 2 के कुष्ठ रोगियों के बीच सामग्री का वितरण के साथ सेल्फ केयर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 
जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. शालिग्राम पांडेय ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये कहा इस प्रशिक्षण का उद्देश्य कुष्ठ रोगियों के लिए आसान इलाज की उपलबध्ता के साथ ही रोग संबन्धित मिथकों से समाज को मुक्ति दिलाना भी है। यदि हम कुष्ठ रोगियों को तिरस्कार की नजर से देखेंगे तो वह अपना रोग छुपाने को मजबूर होंगे। इससे हम कभी भी इसे पूरी तरह मिटा नहीं पाएंगे। तत्पश्चात प्रशिक्षण सह उन्मुखीकरण कार्यक्रम में जिले के सभी प्रखण्डों से आये दो दर्जन लोगों को प्रशिक्षित किया गया। 
कुष्ठ रोग के दोनों अवस्थाओं के लिए अलग किट , सभी प्रखण्डों में है उपलव्ध: 
डॉ. शालिग्राम पांडेय ने बताया, कुष्ठ पूरी तरह से ठीक होने वाले मायकोबैक्टीरियम लैप्री से पनपने वाली माइक्रो बैक्टीरिया जनित बीमारी है। इसके आरंभिक स्टेज पीबीटी या पोसिबेसलरी ट्रीटमेंट में जहां वयस्कों को प्रथम दिन राइफैम्पिसिन 300 एमजी की दो गोलियां और डैप्सोन 100 एमजी की एक गोली तथा 28 दिनों तक प्रति दिन एक डैप्सोन की गोली लेने की आवस्यकता है। वहीं, 2 से 14 साल के बच्चों को राइफैम्पिसिन की उसी मात्रा के साथ डैप्सोन की 50 एमजी की गोली लेने की सलाह दी जाती है। यह पूरा 6 महीने का कोर्स है। लेकिन एमबीटी या मल्टिबेसलरी ट्रीटमेंट पूरे 12 महीने दवा खाने की जरूरत है। जिसमें राइफैम्पिसिनऔर डैप्सोन के अलावा प्रतिदिन क्लोफैज़िमाइन की गोली भी आवश्यक है। ये सभी डोज बीमारी के अलग अलग अवस्था के अनुसार अलग अलग ब्लिस्टरपैक में  स्वास्थ्य विभाग की तरफ से सभी चिकित्सा केन्द्रों पर निशुल्क उपलव्ध हैं।
रोग के गंभीरता को समझना जरूरी, प्रारंभिक अवस्था में इलाज से विकलांगता से बचाव संभव :
प्रशिक्षण में उपस्थित सभी सहभागियों को रोग के लक्षणों के बारे में अधिक जानकारी देते हुये डॉ. शालीग्राम पांडेय ने बताया, कुष्ठ के जीवाणु बहुत धीमी गति से विकसित होते हैं इसलिए इन्हें  चिह्नित होने में लगभग 5 साल का समय लग जाता है।इस रोग के लक्षण मुख्यतः त्वचा पर घाव या दाग के रूपमें दिखते हैं। जो इलाज के अभाव में नसों, सांस नली और आंखों को स्थायी रूप से प्रभावित करता है। यह रोग किसी भी उम्र में हो सकता है। इसलिए प्रारम्भिक अवस्था में लक्षणों को पहचान कर रोग को गंभीर होने से बचाया जा सकता है। इसके लक्षणों में त्वचा सुन्न होना, नसें क्षतिग्रस्त ग्रस्त होना, वजन का कम होना, त्वचा पर फोड़े या चकत्ते बनना एवं त्वचा पर पीले धब्बा बनना है।
एमबीटी ग्रेड 2 के रोगियों के लिए 1500 रुपये का प्रावधान: 
पारा मेडिकल वर्कर नागेश कुमार दत्त ने बताया, यदि एमबीटी से ग्रस्त कुष्ठ रोगियों  में विकलांगता की स्थिति आती है तो सरकार द्वारा 15 सौ रुपये प्रति माह आर्थिक सहयोग दिया जाता है। वहीं, वैसे मरीजों के बच्चों की परवरिश योजना के तहत एक हजार रुपये प्रति बच्चे दो बच्चों के रूप में प्रति माह आर्थिक सहायता बालिग होने तक दी जाती है। इसके अलावा कुष्ठ रोगियों के लिए सेल्फ केयर किट और निशुल्क परामर्श भी दिया जाता है।


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