विद्यालय की छात्राएं बीते 28 जुलाई को शिकायत लेकर सीधे उप विकास आयुक्त के कार्यालय पहुंची थीं। छात्राओं ने प्रधानाध्यापिका और शिक्षिकाओं पर मारपीट व दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे। मामले की जांच कराई गई और जांच रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग ने प्रधानाध्यापिका अंजु कुमारी को निलंबित करते हुए विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से 3 सितंबर को जारी आदेश के अनुसार, जांच में छात्राओं ने आरोप लगाया कि विद्यालय में शिक्षिकाओं द्वारा उनके साथ मारपीट की जाती है। प्रधानाध्यापिका अंजु कुमारी पर लोहे के स्केल और चप्पल से छात्राओं की पिटाई करने का भी आरोप सामने आया।
जांच के दौरान विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में भी कई कमियां मिलीं। छात्र-छात्राओं की उपस्थिति संतोषजनक नहीं थी, शिक्षकों का पाठ-टीका अद्यतन नहीं पाया गया और कुछ शिक्षक ड्रेस कोड में भी नहीं मिले। जांच रिपोर्ट में शिक्षक-शिक्षिकाओं और बच्चों के बीच बेहतर समन्वय का अभाव, विद्यालय प्रबंधन में लापरवाही तथा शैक्षणिक कार्य संतोषजनक नहीं होने की बात भी कही गई है।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि विद्यालय में बच्चों के बीच होने वाली आपसी लड़ाई की शिकायतें थीं, लेकिन पठन-पाठन का बेहतर माहौल कायम करने और बच्चों के बीच समन्वय स्थापित करने में शिक्षक-शिक्षिकाएं सफल नहीं रहे। प्रधानाध्यापिका से 14 अगस्त को स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
इसके बाद बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत प्रधानाध्यापिका अंजु कुमारी को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई के अधीन कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय प्रखंड संसाधन केंद्र, चौसा निर्धारित किया गया है।
लगातार घटनाएं और त्वरित कार्रवाई :
जिले में हाल के दिनों में स्कूलों से जुड़े गंभीर मामले लगातार सामने आए हैं। डुमरांव के नथुनी अहीर के डेरा स्थित मध्य विद्यालय में छात्राओं से कुकर्म के मामले के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आई थी। इसके बाद ब्रह्मपुर के गरहथा कला मध्य विद्यालय में निरीक्षण के दौरान एक छात्रा से कंधे की मालिश कराने के आरोप समेत अन्य गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर प्रभारी प्रधानाध्यापक सहित चार शिक्षकों को निलंबित किया गया।
अब छात्राओं की शिकायत पर एक और प्रधानाध्यापिका के निलंबन ने साफ कर दिया है कि स्कूलों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, अनुशासनहीनता और शैक्षणिक लापरवाही के मामलों पर शिक्षा विभाग सख्त रुख अपना रहा है। एक के बाद एक हो रही कार्रवाई से जिले के शिक्षा विभाग और सरकारी स्कूलों में हड़कंप मचा हुआ है।



















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