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डीएनए से एआई तक... एमवी कॉलेज में सजा विज्ञान का मंच, विशेषज्ञों ने खोले मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के नए राज


बक्सर । जीवन की बुनियादी संरचना से लेकर कैंसर, वैक्सीन, जेनेटिक इंजीनियरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक—विज्ञान की अलग-अलग धाराओं को एक मंच पर जोड़ते हुए महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय (एमवी कॉलेज) में मॉलिक्यूलर बायोलॉजी पर गहन मंथन हुआ। मानस सभागार में जंतु विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘मॉलिक्यूलर बायोलॉजी : एन इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच इन लाइफ साइंसेज’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।



कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। प्राचार्य प्रो. (डॉ.) कृष्णा कांत सिंह ने कहा कि 21वीं सदी अंतरविषयक शोध की है। जीवन विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों का समन्वय मानव स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है।

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के प्रो. (डॉ.) आनंद किशोर ने डीएनए, आरएनए, प्रोटीन संश्लेषण और सेंट्रल डोग्मा की वैज्ञानिक बारीकियां समझाईं। वहीं प्रो. दीनानाथ पंडित ने रेप्लिकेशन, ट्रांसक्रिप्शन, ट्रांसलेशन और जीन रेगुलेशन को मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के चार आधार स्तंभ बताया। उन्होंने हाचिमोजी डीएनए, एआई, ई-डीएनए और वैक्सीन तकनीक के बढ़ते महत्व पर भी प्रकाश डाला।



मुख्य अतिथि एवं पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) एन.के. साह ने डीएनए डबल हेलिक्स की खोज से लेकर जेनेटिक इंजीनियरिंग और कृषि क्रांति तक की वैज्ञानिक यात्रा को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं, बल्कि मानव जीवन की चुनौतियों का समाधान खोजने का महत्वपूर्ण माध्यम है।

संगोष्ठी के दौरान वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. नवी रंजन द्वारा लिखित दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. नवीन शंकर पाठक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने किया। राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।







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