बक्सर । गोस्वामी तुलसीदास की साहित्यिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रघुनाथपुर स्थित तुलसी स्थान पर तीन दिवसीय राजकीय तुलसी महोत्सव आयोजित करने की कवायद तेज हो गई है। जिला प्रशासन की पहल पर महोत्सव की रूपरेखा और अनुमानित खर्च का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर लिया गया है। आयोजन के लिए करीब 14 लाख रुपये का प्रस्तावित बजट तैयार किया गया है। हालांकि अंतिम स्वीकृति सक्षम स्तर से मिलना बाकी है।
जिलाधिकारी साहिला के निर्देश पर ब्रह्मपुर बीडीओ सोनू कुमार ने कार्यक्रम की रूपरेखा, स्थल की ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्ता, प्रशासनिक व्यवस्था और अनुमानित खर्च समेत विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी को उपलब्ध करा दिया है। इसके आधार पर रिपोर्ट सांस्कृतिक कार्य निदेशालय को भेजी जाएगी।
प्रस्तावित तीन दिवसीय महोत्सव में रामकथा, तुलसी साहित्य पर परिचर्चा, कवि गोष्ठी, रामचरितमानस आधारित नृत्य-नाटिका और स्थानीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी। देश-प्रदेश के प्रसिद्ध रामकथा वाचकों, विद्वानों और कवियों को आमंत्रित करने के साथ स्थानीय कलाकारों को भी मंच देने की योजना है।
वर्षों के प्रयास के बाद जगी उम्मीद :
रघुनाथपुर में महोत्सव और तुलसी आश्रम के विकास को लेकर तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश कुमार ओझा लंबे समय से प्रयासरत हैं। उनकी पहल पर बक्सर विधायक आनंद मिश्रा ने तुलसी आश्रम को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए पर्यटन मंत्रालय को पत्र लिखा था। वहीं डुमरांव विधायक राहुल सिंह ने राजकीय तुलसी महोत्सव के आयोजन को लेकर कला एवं संस्कृति मंत्रालय से अनुशंसा की थी।
तुलसी विचार मंच के अध्यक्ष संतोष सिंह समेत अन्य सदस्यों ने जिला प्रशासन की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि राजकीय स्तर पर महोत्सव से तुलसीदास की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक पहचान मिलने के साथ स्थानीय कलाकारों और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है।
14 लाख के बजट का प्रस्ताव :
प्रारंभिक प्रस्ताव में रामकथा वाचकों, विद्वानों व कवियों के मानदेय एवं आमंत्रण के लिए 5 लाख, टेंट, लाइट व साउंड के लिए 4 लाख, प्रसाद एवं जलपान के लिए 1 लाख, नृत्य-नाटिका व सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए 1.50 लाख, मंच सजावट व अन्य व्यवस्था के लिए 1 लाख, प्रचार-प्रसार के लिए 50 हजार तथा स्थानीय कलाकारों के मानदेय के लिए 1 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
स्थानीय मान्यता के अनुसार रघुनाथपुर का तुलसी स्थान गोस्वामी तुलसीदास की स्मृतियों और रामकथा परंपरा से जुड़ा है। यहां स्थित प्राचीन तुलसी चबूतरे को भी स्थानीय आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध राजस्व अभिलेखों और शाहाबाद गजेटियर में भी तुलसीदास के रघुनाथपुर प्रवास से जुड़े उल्लेख का दावा किया जाता है।
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