बक्सर । विशेष पॉक्सो न्यायालय के विशेष न्यायाधीश सह अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश षष्ठम अमित कुमार शर्मा की अदालत ने पॉक्सो मामले में आरोपितों के रिश्तेदारों को अभियोजन पक्ष का गवाह बनाए जाने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने मामले की अनुसंधानकर्ता की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आदेश की प्रति बक्सर एसपी को भेजने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
मामला पॉक्सो कांड संख्या 82/2025 से जुड़ा है, जो एससी-एसटी थाना कांड संख्या 14/2025 से संबंधित है। मामले में राज्य बनाम आकाश चौधरी एवं अन्य की सुनवाई चल रही है। अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में आवेदन दाखिल कर चार गवाहों के नाम गवाहों की सूची से हटाने का अनुरोध किया गया था।
अभियोजन की ओर से दायर आवेदन में कहा गया कि संबंधित चारों गवाह आरोपितों के रिश्तेदार हैं। इसके अलावा बीएनएसएस की धारा 180 के तहत दर्ज उनके बयानों में उन्होंने अभियोजन के मामले का समर्थन नहीं किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोपितों के परिजनों को अभियोजन पक्ष का गवाह बनाए जाने से अनुसंधान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठते हैं। आदेश में अनुसंधानकर्ता की कार्यशैली को पेशेवर कदाचार के दायरे में आने वाला बताया गया है। इस मामले की अनुसंधानकर्ता तत्कालीन थानाध्यक्ष मोना कुमारी थीं।
अदालत ने अभियोजन के आवेदन को स्वीकार करते हुए संबंधित गवाहों को परीक्षण के लिए प्रस्तुत करने की आवश्यकता समाप्त कर दी। साथ ही आरोपपत्र में गवाहों के कॉलम में इस संबंध में आवश्यक उल्लेख करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई 30 सितंबर को अभियोजन साक्ष्य के लिए निर्धारित की गई है।
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