बक्सर । इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के क्षतिग्रस्त होने के बाद उत्पन्न स्थिति को लेकर जिला कांग्रेस नेताओं ने रेलवे गुमटी को तत्काल जनहित में खोलने तथा पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। यह मांग बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. मनोज पांडे, जिला अति पिछड़ा प्रकोष्ठ कांग्रेस अध्यक्ष विनोद मौर्य तथा जिला किसान प्रकोष्ठ कांग्रेस अध्यक्ष संजय पांडे ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर की।
तीनों नेताओं ने कहा कि लगभग 26.40 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इटाढ़ी रेलवे ओवरब्रिज का उद्घाटन के महज 10 दिनों के भीतर एक हिस्सा धंस जाना या क्षतिग्रस्त हो जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि यह केवल तकनीकी विफलता का मामला नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और सरकारी विकास योजनाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आरओबी के क्षतिग्रस्त होने से आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय जाने वाले छात्र-छात्राएं, मरीज, किसान, व्यापारी और दैनिक यात्री वैकल्पिक मार्गों के अभाव में परेशान हैं। उन्होंने मांग की कि जनता की सुविधा को देखते हुए रेलवे गुमटी को तत्काल प्रभाव से खोला जाए, ताकि आवागमन सुचारु रूप से बहाल हो सके।
संयुक्त बयान में नेताओं ने निर्माण एजेंसी, गुणवत्ता निगरानी करने वाले अधिकारियों, तकनीकी स्वीकृति प्रदान करने वाले अभियंताओं और अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि निर्माण में प्रयुक्त सरिया, सीमेंट, गिट्टी समेत अन्य सामग्रियों की गुणवत्ता, भुगतान अभिलेख, माप पुस्तिका और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट की भी गहन जांच कराई जानी चाहिए।
नेताओं ने आरोप लगाया कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पुलों, सड़कों और अन्य निर्माण कार्यों में सामने आ रही अनियमितताएं भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और गुणवत्ता नियंत्रण की कमजोर व्यवस्था की ओर संकेत करती हैं। उनका कहना था कि यदि निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों का पालन किया गया होता, तो उद्घाटन के कुछ दिनों के भीतर ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
उन्होंने यह भी कहा कि जब आरओबी निर्माण का श्रेय लेने की होड़ मची थी, तब गुणवत्ता परीक्षण और सुरक्षा मानकों के पालन पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया गया, इसका जवाब भी जनता को मिलना चाहिए। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पुल के क्षतिग्रस्त होने के वास्तविक कारणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
संयुक्त वक्तव्य में कुछ जनप्रतिनिधियों द्वारा जिलाधिकारी बक्सर पर लगाए जा रहे आरोपों को अनुचित और दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया। नेताओं ने कहा कि यह परियोजना वर्तमान जिलाधिकारी के कार्यभार संभालने से काफी पहले शुरू हो चुकी थी और अधिकांश कार्य पूरा हो चुका था। ऐसे में बिना तथ्यों के उन्हें जिम्मेदार ठहराना प्रशासनिक मर्यादा और निष्पक्षता के विरुद्ध है।
उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी एक संवेदनशील और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी हैं तथा सीमित संसाधनों में भी जनहित के कार्यों के प्रति सजग रहती हैं। प्रशासन का मनोबल गिराने के उद्देश्य से राजनीतिक आरोप लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व समस्याओं का समाधान निकालना और सरकार व प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर जनहित में कार्रवाई सुनिश्चित करना है। यदि वास्तव में जनता की चिंता है तो सभी जनप्रतिनिधियों को एकजुट होकर रेलवे गुमटी खोलने, वैकल्पिक यातायात व्यवस्था बहाल करने और प्रभावित लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए पहल करनी चाहिए।
अंत में नेताओं ने भारत सरकार, बिहार सरकार, रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन से पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक आत्मा सत्य, जवाबदेही और जनहित में निहित है तथा दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए।
................. ................. ............... ..............
Send us news at: buxaronlinenews@gmail.com
ख़बरें भेजें और हम पहुंचाएंगे,
आपकी खबर को सही जगह तक...


















0 Comments