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बिना लक्षण वाले स्तन कैंसर को जानें




ससमय कैंसर की स्क्रीनिंग करा कर रहें सुरक्षित 
बिना लक्षण वाले स्तन कैंसर की पहचान मुश्किल 
नियमित स्तन की जांच करें एवं जागरूक बनें  
भभुआ/ 8 नवंबर। जिला सहित पूरे राज्य में 7  से 14 नवंबर तक निःशुल्क  कैंसर रोग परामर्श सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है. निःशुल्क कैंसर रोग परामर्श सप्ताह के दौरान लगने वाले शिविर में  मरीजों को सामान्य कैंसर जैसे मुंह का कैंसर, स्तन कैंसर, गर्भाशय का कैंसर इत्यादि की स्क्रीनिंग की जा रही है. जिसमें विशेष रूप से महिलाओं के कैंसर (स्तन और गर्भाशय का मुख) की  स्क्रीनिंग हेतु अलग से एक कमरे की व्यवस्था की गयी है. साथ ही उसमें सामान्य कैंसर जैसे मुंह, स्तन और गर्भाशय के मुख के कैंसर इत्यादि के संभावित कारणों, लक्षणों एवं उसके बचाव के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी कार्य किया जा रहा है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार स्तन कैंसर ऐसे भी होते हैं जिनके लक्षण नजर नहीं आते हैं. इन्हें एसिंपटोमैटिक ब्रेस्ट  कैंसर के नाम से जाना जाता है. 
बिना लक्षण वाले स्तन कैंसर को जानें:
चिकित्सकों के अनुसार स्तन कैंसर सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसर का एक प्रकार है. महिलाओं में इसे लेकर जागरूकता की कमी देखी जाती है. ज्यादातर महिलाएं शर्म और संकोचवश इसके बारे में खुलकर चर्चा करने से कतराती हैं. स्तन कैंसर बिना किसी लक्षण के भी स्त्री के शरीर में पाया जाता है जिसे एसिंपटोमैटिक ब्रेस्ट  कैंसर कहा जाता है. इस स्थिति में इसकी जल्दी पहचान नहीं होने के कारण यह शरीर के अन्य अंगों  में फैलता और इसकी पहचान अंतिम चरणों में होती है. ऐसी स्थिति में इसका उपचार करना कठिन हो जाता है. 
नियमित स्तन की जांच करें एवं जागरूक बने:
जिला गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. राजनारायण सिंह ने बताया कि स्तन कैंसर की पहचान के लिए ससमय स्क्रीनिंग करना जरूरी है. 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को अपने चिकित्सक से बात कर नियमित स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. एक्सरे और मेमोग्राम से ज्यादातर स्तन कैंसर की पहचान की जाती है. उन्होंने बताया कि स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर महिलाओं को स्तन का अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सीटी स्कैन आदि कराने की सलाह भी चिकित्सकों द्वारा दी जाती है. रेडियो पैथोलॉजिकल जांच के बाद उपचार शुरू किया जाता है.  
स्तन कैंसर का उपचार:
डॉ. सिंह ने बताया कि स्तन कैंसर का उपचार, प्रकार, चरण एवं कैंसर की जगह के हिसाब से किया जाता है. मरीज को उसके कैंसर की स्थिति के अनुसार कीमोथेरेपी, सर्जरी, रेडिएशन एवं हॉर्मोन थेरेपी की सलाह दी जाती है. चिकित्सक बताते हैं कि मरीज के लिए कौन सा उपचार सही है. शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने से मरीज की जान बच जाती  और वह एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सकती है. 
इन्हें अपनाकर स्तन कैंसर से बचें:
मोटापा से बचें 
नियमित एवं संतुलित आहार को जीवन का हिस्सा बनायें 
नियमित व्यायाम करें
अधिक उम्र में गर्भधारण से बचें 
स्तनपान कराएँ .



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